गरुड़ पुराण के अनुसार हमें इन 10 जगह खाने से बचना चाहिए

दोस्तों आज में आपको गरुड़ पुराण जो की वेद  व्यास जी द्वारा रचित और  18 पुराणों में से एक है और इनमे 279 अध्याय और 1800 श्लोक है.

गरुड़ पुराण के अनुसार हमें इन 10 जगह खाने से बचना चाहिए

इस ग्रन्थ का हमें जरुर अध्ययन करना चाहिए क्यों की इसमें मृत्यु के बाद की घटनाओ, यम लोक, प्रेत लोक, और पूरी 84 लाख योनीयो के के बारे में बताया गया है. और इसमें आप कई मानव रुपी जीवन में उपयोगी बातों का ज्ञान ले सकते है.


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तो आइये जानते है गरुड़ पूरण के अनुसार कुछ विशेष नियम.


1. गरुड़ पूरण का जो आचार कांड है उसमे बताया गया है की हमें इन 10 लोगो के यहाँ पर भूल कर भी भोजन नहीं करना चाहिए.


2. चरित्रहीन स्त्री के हाथ से बना हुआ भोजन हमें कभी नहीं करना यहां चरित्रहीन स्त्री का अर्थ यह है कि जो स्त्री स्वेच्छा से पूरी तरह अधार्मिक व्यव्हार करती है. गरुड़ पुराण में लिखा है कि जो व्यक्ति ऐसी स्त्री के यहां भोजन करता है,  वो भी उसके पापों का फल प्राप्त करता है. तो हमें एसी स्त्री के घर पर भोजन नहीं करना चाहिए.

3. हमें चोर के घर पर भी भोजन नहीं करना चाहिए जो की अपराधी सिद्ध हो गया हो तो हमें उसके घर का भोजन नहीं करना चाहिए. गरुड़ पुराण के अनुसार चोर के यहां पर भोजन करने पर उसके पापों का असर हमारे जीवन पर भी हो होता है.

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4. हमें किन्नरों के घर पर भी भोजन नहीं करना चाहिए, गरुड़ पूरण के अनुसर ऐसा माना जाता है कि इसको दान देने पर हमें अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है. पर इनके यहां भोजन नहीं करना चाहिए. किन्नर कई प्रकार के लोगों से दान में धन प्राप्त करते हैं और इन्हें दान देने वालों में अच्छे-बुरे, दोनों प्रकार के लोग होते हैं और उन्ही पैसो से वो भोजन बनता है जिसको हमें ग्रहण नहीं करना चाहिए.



5. अगर कोई व्यक्ति किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है, याकोई व्यक्ति छूत के रोग का मरीज है तो उसके घर भी हमें भोजन नहीं करना चाहिए. क्यों की ऐसे व्यक्ति के यहां भोजन करने पर हम भी उस बीमारी की गिरफ्त में आ सकते हैं. और लंबे समय उस रोगी इंसान के घर के वातावरण में भी बीमारियों के कीटाणु फैले हो सकते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते है.


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6. अभी वर्तमान समय में तो काफी लोग ब्याज पर दूसरों को पैसा देते हैं, लेकिन जो लोग दूसरों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए और अनुचित रूप से अत्यधिक ब्याज लेते रहते हैं, गरुड़ पुराण के अनुसार उनके घर पर भी हमें भोजन नहीं करना चाहिए. हमें किसी भी परिस्थिति में दूसरों की मजबूरी का लाभ नहीं उठाना चाहिए क्यों की यह पाप माना गया है. गलत ढंग से कमाया गया धन, अशुभ फल ही देता है.



7. अगर कोई व्यक्ति निर्दयी है, और दूसरों के प्रति मानवीय भाव नहीं रखता है, और  सभी को कष्ट देते रहता है तो उसके घर का भी भोजन हमें कभी भी नहीं खाना चाहिए. ऐसे लोगों द्वारा कमाया गये धन से बना खाना हमारा स्वभाव भी वैसा ही बना देता है. और इससे हम भी निर्दयी बन सकते हैं. जैसा खाना हम खाते हैं हमारी सोच और विचार भी ठीक उसके जैसे ही बन जाते है


8. जो लोगों की आदत दूसरों की चुगली करने की होती है, हमें  उनके यहां पर या उनके द्वारा दिए गए खाने को भी कभी नहीं खाना चाहिए. चुगली करना बुरी आदत है. चुगली करने वाले लोग दूसरों को परेशानियों फंसा देते हैं और स्वयं आनंद उठाते हैं. इस काम को भी पाप की श्रेणी में रखा गया है. अत: ऐसे लोगों के यहां हमें कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए.

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9. अगर कोई राजा निर्दयी है और अपनी प्रजा का ध्यान नहीं रखता है और सभी को कष्ट देता है तो उसके यहां का भोजन नहीं करना चाहिए. क्योकि राजा का कर्तव्य है कि प्रजा का ध्यान रखें और अपने अधीन रहने वाले लोगों की आवश्यकताओं को भी पूरी करें. जो राजा इस बातों का नहीं रखता है और सभी को सताता रहता है तो हमें उसके यहां का भोजन नहीं खाना चाहिए.


10. क्रोध इंसान का सबसे बड़ा शत्रु होता है. हमेशा क्रोध के आवेश में आने वाला व्यक्ति अच्छे और बुरे का फर्क कभी नहीं समजता या तो फिर भूल जाता है. इसी कारण व्यक्ति को हानि भी उठानी पड़ती है. ठीक वैसे ही जो लोग हमेशा ही क्रोधित रहते हैं, उनके यहां भी हमें कभी भोजन नहीं करना चाहिए. अगर हम उनके यहां भोजन करेंगे तो उनके क्रोध के सारे गुण हमारे अंदर आजायेंगे और हम उनके जैसे बन जायेंगे.



11. नशा करना भी एक बहुत बड़ा पाप है. और जो लोग नशीली चीजों का व्यापार करते हैं, गरुड़ पुराण में उनका यहां भोजन करना वर्जित माना गया है. नशे के कारण कई लोगों के घर बर्बाद हो ते जा रहे हैं. इसका दोष नशा बेचने वालों को भी लगता है. और ऐसे लोगों के यहां भी हमें कभी भोजन नहीं करना चाहिए और उनके पाप का असर हमारे जीवन पर भी होता है..

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