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Wednesday, 9 May 2018

कौन है यक्ष और यक्षिणी और क्यों करते हैं इनकी साधना

आज के टाइम  में सभी लोग अलग-अलग देवी देवताओ की  पूजा- उपासना करते है, हमारे इस ब्रह्मांड में कई सारे ऐसे लोक है जिसमे अलग-अलग देवी देवताए निवास करते है. कुछ मान्यता के मुताबिक हमारे नजदीकी लोक में रहने वाले देवी-देवता जल्दी ही प्रसन्न हो जाते है, ऐसा इसीलिए होता है की लगातार एक ही दिशा और समय पर कोइ मंत्र की साधना करते है तो उन तक तरंगे जल्दी ही पहुच जाती है, और इसी कारण से यक्ष, गन्धर्व, अप्सरा की कि हुयी साधनाए जल्दी पूरी हो जाती है क्योकि इन सबके  लोक हमारी पृथ्वी के सबसे पास में है.


कौन है यक्ष और  यक्षिणी और क्यों करते हैं इनकी साधना


यक्ष यानि की जादू की शक्तिया और यक्षिणी को शिव जी की दासिया भी कहा जाता है, आदि- अनादी काल में  ये सब रहस्यमई जातीया थी. जैसे की देव, दानव, यक्ष, राक्षस, गन्धर्व, किन्नर, वानर, अपसराए, रीझ, किरात, नाग, भल्ल आदि. ये सभी मानव जाती से कुछ अलग ही थे.

क्या आपको पता है की देवो के बाद देवीय शक्तियों में दूसरा नंबर यक्षो का ही आता है, पर लोगो की कुछ गलत मान्यताये भी है जिसमे लोग यक्षिणीयो को किसी भूत-प्रेत की तरह मानते है. वैसे हम आपको बतादे की यक्षिणीया सकारात्मक शक्तिया है और पिशाचिनियां नकारात्मक शक्तिया है.

इन सबके अंदर कुछ रहस्यमई ताकते होती है जिससे वे मानव जाती की मदद करते है, जैसे की  रावण का सौतेला भाई कुबेर जो की एक यक्ष था और रावण एक राक्षस.

इससे जुडी भी एक कहानी प्रचलित है जिसमे महर्षि पुल्सत्य के पुत्र विश्रवा की दो पत्निया थी इल्विला और कैकसी. इलविला यक्ष जाती की थी और कैकसी राक्षस जाती की ठीक वैसे ही इलविला के गर्भ से कुबेर का जन्म हुआ जो की एक यक्ष है और कैकसी से रावण, विभीषण और कुम्भकर्ण जो की राक्षस थे.



यक्ष और यक्षिणियां कुल मिलकर 64 है जिसमे से कुछ निचे दी गयी है.


● पद्मिनी यक्षिणी
● कनकावती यक्षिणी
● मनोहारिणी यक्षिणी
● सुर सुन्दरी यक्षिणी
● रतिप्रिया यक्षिणी
● नटी यक्षिणी
● कामेश्वरी यक्षिणी
● अनुरागिणी यक्षिणी


अगर कोई यक्षिणी की साधना करे तो इससे क्या फल मिलता है.


◾पद्मिनी यक्षिणी

पद्मिनी यक्षिणी अपने साधक को आत्मविश्वास के साथ साथ स्थिरता भी प्रदान करती है. ये यक्षिणीया अपने साधक को मानसिक बल प्रदान करती है जिससे साधक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ पाता है.

◾कनकावती यक्षिणी

ये यक्षिणी की साधना करने पर साधक में अत्यंत तेजस्विता आ जाती है और साधक की हर एक मनोकामना पूरी करने में मदद करती है.


◾मनोहारिणी यक्षिणी

ये यक्षिणी को सिद्ध करने पर साधक के वक्तित्व में ऐसी सम्मोहन शक्ति आ जाती है जिसकी मदद से साधक किसी को भी अपने वश में कर सकता है.

◾सुर सुन्दरी यक्षिणी

ये यक्षिणी को सिद्ध करने पर साधक को अपार धन की प्राप्ति होती है और एश्वर्य से भरा जीवन जीता है.


◾रति प्रिया यक्षिणी

अगर कोई साधक और साधिका संयमित होकर ये साधना करले तो उसे कामदेव और रति के समान  सौन्दर्य प्राप्त होता है.


◾नटी यक्षिणी

अगर कोई साधक नटी यक्षिणी को सिद्ध कर लेता है तो उसके आसपास एक सुरक्षा कवच बन जाता है और साधक को सभी तरह से सुरक्षा मिलती है.


◾कामेश्वरी यक्षिणी

यह साधक को पौरुष प्रदान करती है और सभी मनोकामनाए पूरी करती है.


◾अनुरागिणी यक्षिणी

ये यक्षिणी सिद्ध करने पर साधक को धन, यश, मान, कीर्ति आदि प्रदान करती है और अदृश्य रूप से साधक के साथ रहती है.



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