आदि शंकराचार्य के अनमोल विचार - SupportMeYaar.Com | Top News | Ajab Gajab | LifeStyle | And Much More. . .

Breaking

Post Top Ad

Post Top Ad

Monday, 3 April 2017

आदि शंकराचार्य के अनमोल विचार

शंकराचार्य ने भारतीय सनातन धर्म और हिन्दू परंपरा के विकास हेतु आदि गुरु का बहुत बड़ा योग दान है, उन्होंने ही पुरे भारत में चारो मठों की स्थापना की जिसमे श्रृंगेरी मठ, गोवर्द्धन मठ, शारदा मठ और ज्योतिर्मठ है. ईसा से पूर्व आठवीं शताब्दी में स्थापित चारों मठ आज भी चार शंकराचार्यों के नेतृत्व में सनातन परम्परा का प्रचार हो रहा है. मठों के अलावा पूरे देश में बारह ज्योतिर्लिंगों की भी स्थापना की भी की थी. तो आइये ऐसे महान गुरु शंकराचार्य के कुछ अनमोल विचार जानते है.

⚬ इसे भी पढ़े : शिव खेड़ा के अनमोल विचार

आदि शंकराचार्य के अनमोल विचार

जब भी मनमे सच जानने की इच्छा पैदा हो जाये तो दुनिया की सभी चीजे अर्थहीन लगने लगती है.

 सत्य की कोई परिभाषा नहीं होती, भाषा ही मनुष्य का निर्माण करती है लेकिन सत्य मनुष्य का निर्माण नहीं पर अविष्कार करता है. सत्य को कभी भी प्रमाणित नहीं करना पड़ता, उसको सिर्फ उघाड़ना पड़ता है.

 प्रत्येक मनुष्यों को ये बात जान लेनी चाहिए की आत्मा एक राजा है जो शरीर, मन, बुद्धि, और इन्द्रियों से बिलकुल ही अलग है, आत्मा ही ये सब का साक्षात्कार करती है.

⚬ इसे भी पढ़े : स्वामी विवेकानंद के 30 अद्भुत विचार

 मंदीर में वही इंसान पहुचता है जो धन्यवाद देने जाता है, बल्कि मांगने नहीं.

 अज्ञान के कारण आत्मा सिमित लगती है पर जब अज्ञान सामान अँधेरा मिट जाता है तब आत्मा के वास्तविक स्वरुप का ज्ञान हो जाता है.

 मोह से भरे हुए इंसान एक सपने की तरह होते है, वो भी तब तक जब सब कुछ सच लगता है जब तक आप अज्ञान की नींद सो रहे हो. जब आपकी नींद खुलती है तो उसकी कोई सत्ता नहीं रह जाती है.

⚬ इसे भी पढ़े : जॉन वेस्ले के अनमोल विचार

 धर्म की पुस्तके पढने का कोई मतलब नहीं है जब तक आप को सच का पता नहीं चल पाता, ठीक उसी तरह से अगर आप सच को जानते है तो धर्मग्रंथ पढने की कोई आवश्यकता नहीं सिर्फ सत्य की राह पे चले.

 जिस तरह एक प्रज्वलित दिए को चमकने के लिए दुसरे दिए की जरुरत नहीं होती ठीक उसी तरह आत्मा जो की खुद एक ज्ञान स्वरुप है उसे दुसरे और कोई ज्ञान की जरुरत नहीं पड़ती.

⚬ इसे भी पढ़े : भगवान बुद्ध के हिंदी सुविचार

 तीर्थ करने के लिए कही पर जाने की जरुरत नहीं है, सबसे बड़ा और अच्छा तीर्थ तो आपका मन है, जिसको विशेष रूप से सिद्ध किया गया हो.

 एक बात सच है की लोग आपको उसी वक्त याद करते है जिस वक्त आपकी साँस चलती है, जैसे ही साँस रूक जाती है आपसे सभी दूर चले जाते है.

 सत्य की परिभाषा ये है की जो सदा था, जो सदा है और जो सदा रहेंगा.

 आत्मसंयम क्या होता है ? आँखों को दुनिया की सभी चीजो की और आकर्षित न होने देना और बाहरी ताकतों को खुद से दूर रखना.

⚬ इसे भी पढ़े : सिर्फ आप ही स्मार्ट नहीं है लडकिया भी स्मार्ट होती है पढ़े ये पोस्ट 


नोट: ये आर्टिकल आपको कैसा लगा हमें जरूर बताये क्योंकि आपके एक कमेंट से हमें प्रेरणा मिलती है और भी अच्छा लिखने की.... तो प्लीज कमेंट जरुर करे और अपना सुजाव दे. 

अगर आपके पास भी कोई हिंदी में लिखा हुआ प्रेरणादायक, कहानी, कविता, सुझाव, या फिर कोई भी ऐसा लेख जिसको पढ़कर पढने वाले को किसी भी प्रकार का मार्गदर्शन या फायदा होता है तो आप उसे हमारे साथ शेयर करना चाहते है तो अपनी फोटो और नाम के साथ हमें ईमेल करे. हमारी Email ID है  hindimekahe@gmail.com पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ हमारी वेबसाइट पर पब्लिश करेंगे.


No comments:

Post a Comment

• अगर आप इस आर्टिकल के बारे में कुछ कहेंगे या कोई सवाल कमेंट में करेंगे तो हमें बहुत ख़ुशी होगी
• गलत शब्दों का प्रयोग न करे वरना आपका कमेंट पब्लिश नहीं किया जायेगा