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Friday, 19 January 2018

स्पर्म से जुडी कुछ अमेजिंग जानकारी


क्या आपको पता है की सेक्स के दौरान पुरुष के शरीर से जो वीर्य निकलता है उसमे लाखो-करोड़ो स्पर्म बाहर निकलते है, पर क्या आपको पता है की उन सभी में से सिर्फ एक ही स्पर्म ऐसा होता है जो महिला के अंडो के साथ मिलकर प्रजनन की प्रक्रिया को पूरा करता है.



भारत में लोग स्पर्म के बारे में ज्यादा नहीं जानते पर आज हम यहाँ पर आपको कुछ रोचक जानकारी देने वाले है जो की स्पर्म के बारे में है.

स्पर्म से जुडी कुछ अमेजिंग जानकारी


स्पर्म बनने में कितना समय लगता है – पुरुषो के अंडकोष में वैसे तो स्पर्म बनता ही रहता है पर स्पर्म को एकदम परिपक्व होने में और प्रजनन के लिए एकदम सक्रीय होने में लगभग 46 से लेकर 75 दिनों का समय लगता है.

स्वस्थ स्पर्म किसे कहते है – क्या आप जानते है की शरीर से बाहर जो भी स्पर्म निकलता है जो सभी स्वस्थ नहीं होते है. उसमे से लगभग 80% तक स्पर्म ख़राब होता है, पर इसका ये मतलब नहीं है की आपके स्वास्थ्य में कोई खराबी है पर असल में ये स्पर्म जब अंडे की तरफ जाते है तो उस दौड़ में कई सारे ऐसे भी स्पर्म होते है जो की पीछे भी छुट जाते है, सिर्फ स्वस्थ स्पर्म ही अंडे तक पहुच पाते है.

स्पर्म का तापमान – जब आप सेक्स कर्ट एही तो उसके दौरान आपका शरीर काफी गर्म हो जाता है पर आपको पता है की आपके शरीर के तापमान से लगभग 7 डिग्री तक कम होता है आपके स्पर्म का तापमान जिसकी वजह से अंडकोष में स्पर्म सुरक्षित और स्वस्थ रहते है.

पर्याप्त स्पर्म – सामान्य तौर पर पुरुषो में दो अंडकोष होते है जिसके अंदर स्पर्म बनता है पर अगर किसी खास के पास सिर्फ एक ही अंडकोष होता है तो उसकी प्रजनन क्षमता पर कोई भी असर नहीं पड़ता है.

जीवन चक्र – स्पर्म को बनने में कितना समय लगता है वो तो आपको पता चल गया पर उसका जीवन कितना होता है उसके बारे में अगर बात करे तो स्खलन के बाद जब स्पर्म महिला के शरीर में प्रवेश करता है तब आपका स्पर्म वहा पर पांच दिन तक जीवित रहता है, पर अगर ये कोई सुखी जगह पर पर रहे तो ये वीर्य के सूखते ही मर जाता है. और हा एक और रोचक बात की आप वीर्य को किसी गर्म टब में स्खलन करते है तो वो वहा पर घंटो तक तैरते रहते है.

लिंग का निर्धारण – क्या आपको पता भी है की की आपके बच्चे का सेक्स पूरी तरह आपके स्पर्म पर ही निर्भर करता है. कुछ स्पर्म में एक्स क्रोमोसोम (फीमेलa) और कुछ में वाई क्रोमोसोम (मेल) होता है और इन्ही हिसाब से बच्चे का लिंग निर्धारित होता है.