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Tuesday, 15 August 2017

यहाँ पर आजादी से पहले ही अंग्रेजों के सामने फहरा दिया गया था तिरंगा, जानें इस रोचक गाथा को

अपने देश का राष्ट्रध्वज फहराना किसे पसंद नहीं होता, पर क्या आप जानते है की आजादी के पहले ही एक जगह पर अंग्रेजो के सामने राष्ट्रध्वज फहरा दिया था. आप हम आपको इस आर्टिकल में एक ऐसी रोचक गाथा के बारे में बताने जा रहे है जब ब्रिटिश राज्य में भारत के राष्ट्रिय ध्वज तिरंगे को अंग्रेजो के सामने फहरा दिया था.


ये बात उस समय की है जब जब हमारे देश को आजाद करने के लिए बहुत से युवा भी क्रांतिकारी लोगो में शामिल हो रहे थे और ये सभी “गर्म दल” के नाम से जाने जाते थे, ये सभी लोगो ने कई सारे ऐसे कार्य किये थे जिससे ब्रिटिश सरकार की जड़े अन्दर तक हिल गयी थी. आपकी जानकारी के लिए हम आपको बतादे की चोरी-चोर कांड और काकोरी कांड भी इन जैसे युवाओ ने ही किये थे.
ठीक इसी प्रकार एक और कार्य किया गया था जिसका नाम था “धानापुर कांड” ये कांड को जितनी अहेमियत मिलनी चाहिए इतिहास के पन्नो में उतनी नहीं मिली. ये कार्य भी बेहत महत्वपूर्ण और रोमांचक था. अभी थोडा विस्तार से बात करते है की धानापुर ये वही स्थान है जहा पर हमारे देश की आजादी से पहले ही कुछ युवा क्रान्तिकारियो ने हमारा तिरंगा फहरा दिया था और ब्रिटिश सरकार सिर्फ देखती ही रही है.
image : chandaulisamachar
महात्मा गाँधी के सहयोग से जब आंदोलन पूरा हुआ ठीक उसके बाद उत्तर प्रदेश के लोगो में आजादी का भूत चरम चीमा तक पहुच गया था. उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के धानापुर स्थान पर 16 अगस्त 1942 को गाँव की स्थानीय पुलिस स्टेशनो को क्रांतिकारियों ने चारो तरफ से घेर लिया था और तिरंगे को अंग्रेजो के सामने ही फहरा डाला था. ये सब करने के बावजूद भी थाने के दरोगा भी क्रांतिकारीयो को ऐसा करने से मना नहीं कर सके थे. जब लोग उग्र होने लगे तब उसमे क्रांतिकारियों पर गोलियों की बरसात करने लगे, यही सब चल रहा था तब कुछ क्रांतिकारियों ने थाने पर चढ़कर तिरंगे को फहरा दिया था.
image : supportmeyaar.com
इन सभी में गोलिया लगने से कई सारे क्रांतिकारियों शहीद हो गये. इसके बाद लोगो में दरोगा और पुलिस के प्रति भी आक्रोश फुट पड़ा. माना जाता है की इस घटना के बाद कुछ क्रांतिकारियों ने अंग्रेज दरोगा को और तिन चार पुलिस वालों को घेर कर जिन्दा ही जला दिया था. इन सभी में धानापुर में क्रांति और स्वतंत्रता सेनानी “कांता प्रसाद विद्यार्थी” ने अपनी अगुवाई में शुरू कर दिया. कांता प्रसाद विद्यार्थी का जन्म 1896 में उत्तर प्रदेश के चंदोली जिल्ली के हेतमपुर गाँव में जन्म हुआ था. बाद में कांता प्रसाद विद्यार्थी ने देश को आजादी मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी की और से चुनाव भी लगा और धानापुर क्षेत्र से 10 वर्ष तक विधायक भी रहे.
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