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Friday, 13 April 2018

गायत्री मंत्र – जप विधि और फायदे फिर देखे चमत्कार

जैसे की हम सभी जानते है की मंत्र शक्ति एक ऐसी शक्ति है जिसको अपना कर हम हमारे जीवन की सभी समस्या से निजात पा सकते है.हमारे शास्त्रों में भी मंत्र को बहुत ही अदभूत और शक्तिशाली बताया गया है.इन सभी मंत्रो में से एक मंत्र ऐसा मंत्र है जिससे सभी समस्याओ का हल छुपा हुआ है जिसका नाम है गायत्री मंत्र. इस मंत्र के जप करने से जल्द ही शुभ फल प्राप्त होने लगते है.

image : daily bhaskar
तो आइये जानते है थोडा विस्तार से..
गायत्री मंत्र जप का समय क्या होना चाहिए:
गायत्री मंत्र का जप करने के लिए पुराणों में तिन समय बताये गये है जिसमे जप के समय को संध्याकाल भी कहा गया है.
गायत्री मंत्र के जप का समय पहला तो सुबह के वक्त का है जैसे की सूर्योदय से थोड़े समय पहले ही मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए और इसे सूर्योदय के बाद तक करना चाहिए.
मंत्र जप का दूसरा समय है दीपहर का, दोपहर के समय भी इस मंत्र का जप किया जाता है.

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तीसरा समय है सूर्यास्त से कुछ देर पहले का, अंतिम समय सूर्यास्त से पहले का बताया गया है सूर्यास्त से पहले मंत्र जप शुरू कर देना चाहिए और सूर्यास्त के कुछ देर के बाद जप करना चाहिए, और विशेष बात आपको बता देते है की अगर आपको संध्याकाल के दरमियान करना है तो इसे आपको मौन रहकर या तो मानसिक रूप से जप करना चाहिए. किसी भी मंत्र को अधिक तेज आवाज में कभी भी नहीं करना चाहिए.
गायत्री मंत्र : ऊँ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।
गायत्री मंत्र का अर्थ : परम पिता परमात्मा के तेज का हम ध्यान करते है, परमात्मा का वही तेज हमारी बुद्धि को सद्मार्ग की और चलने के लिए हमें प्रेरित करे.
गायत्री मंत्र जप की विधि : गायत्री मंत्र के जप करने के लिए रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना चाहिए तो वो सबसे ज्यादा उत्तम होगा, जप करने से पहले स्नान और आदि कर्मो से खुद को पवित्र कर लेना चाहिए. इनमे मंत्र के जप की संख्या 108 होनी चाहिए.मंत्र जप हम घर के मंदिर में या तो किसी पवित्र स्थान पर गायत्री माता का ध्यान लगा कर कर सकते है.
गायत्री मानता जप के फ़ायदे :
  • त्वचा में एकदम चमक आ जाती है.
  • बुराईयों से मन दूर रहते है.
  • पूर्वाभास होने लगता है.
  • उत्साह और सकारात्मकता बढती है
  • धर्म और सेवा के कार्यो में मन लगने लगता ह.
  • स्वप्न सिद्धि प्राप्त होती है.
  • आशीर्वाद देने की शक्ति प्राप्त होती है.
  •  क्रोध शांत होता है.
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