रावण के बारे में रोचक और अद्भूत जानकारी - SupportMeYaar.com

Trending Now

Post Top Ad

Wednesday, 4 October 2017

रावण के बारे में रोचक और अद्भूत जानकारी

दोस्तों आज दशहरा के दिन आपको हम रावन के बारे में कुछ ऐसी रोचक और अदभूत बातें बताने वाले है जिसको आज तक कोई भी नहीं जान पाया है.
रावण” ये एक ऐसा नाम है जिस नाम से पुरे ब्रह्मांड में या पूरी दुनिया में और कोई भी व्यक्ति नहीं मौजूद है. आज के इस समय में या तो यु कहू तो रामायण काल से ले कर आज तक आप को राम तो बहुत मिल जायेंगे पर रावण एक भी नहीं मिलेगा. हा एक बात जरुर है की बुरे कर्म करने वाले रावण आपको इस संसार में बहुत मि जायेंगे पर अच्छे कर्म करने वाले राम एक भी नहीं.


image : allindiaroundup
आज दशहरा के दिन हम आपको राजाधिराज लंकाधिपति महाराज रावण जिसको दशानन के नाम से भी जाना जाता है जिनके बारे में आज कुछ रोचक और रहस्य से भरी बातें बताने जा रहे है. सभी ग्रंथो को छोड़कर सिर्फ वाल्मीकि द्वारा लिखित महाकाव्य रामायण में रावण का सबसे बड़ा प्रमाणिक इतिहास मिलता है. आज हम आपको रामायण और अन्य ग्रंथो से संग्रहित करके रावण के बारे में कुछ ऐसे रहस्य आपके सामने लाने की कोशिश करते है. रावण सिर्फ दुराचारी ही नहीं था बल्कि वे धर्म को भी बहुत मानने वाला और महाज्ञानी माना जाता है.
रावण के बारे में रोचक और रहस्य से भरी जानकारी
● लंकापति रावण के दादाजी का अनाम प्रजापति पुलत्स्य था जो की ब्रह्मा जी के दस पुत्रो में से एक थे. अगर ऐसे देखा जाए तो रावण ब्रह्मा जी का पडपौत्र हुआ जबकि उसने अपने पिता जी और दादा जी से हटकर एक अधर्म का साथ दिया.
● रामायण में एक जगह यह भी बताया गया है की रावण ने भगवान् श्री राम के लिए यज्ञ किया था वो यज्ञ करना रावण के लिए बेहद ही जरुरी था क्योकि लंका तक पहुचने के लिए जब श्री राम ने सेना के लिए पुल बनाना शुरू किया तब शिवजी का आशीर्वाद पाने से पहले भगवान् श्री राम की आराधना करनी पड़ी थी.
image : twitter
● ऐसा भी माना जाता है की रावण इतना ज्यादा शक्तिशाली था की उसने नवग्रहों को भी अपने बस में करके रखा था, कथाओ में बताया जाता है की जब मेघनाथ का जन्म हुआ था तब रावण ने ग्रहों को 11वें स्थान पर रहने को कहा था ताकि उसे अमरता मिल सके पर शनिदेव ने ऐसा करने से माना कर दिया और वे 12वें स्थान पर विराजमान हो गये. इस घटना से रावण इतना ज्यादा नाराज हो गया की उसने शनिदेव पर आक्रमण कर दिया और कुछ समय के लिए बंधी बना लिया था.
● रावण ये बात जानता था की उसकी मौत भगवान् विष्णु के अवतार के हाथो ही लिखी हुई है और साथ ही में रावण ये भी जानता था की विष्णुजी के हाथो मरने से उसको मोक्ष की प्राप्ति होगी और साथ ही में उसका असुर रूप का भी विनाश हो जायेगा.
● आप सभी ने रावण के दस सिरों को कहानिया तो सुनी ही होंगी पर इसमें दो प्रकार से माना जाता है जिसमे एक मत है की रावण के दस सर नहीं थे जब की वो केवल 9 मोतियों की माला से बना एक भ्रम था जिसको उसकी माता ने दिया हुआ था. दुसरे मत के अनुसार जब रावण शिवजी को प्रस्सन करने के लिए घोर तप किया था तब रावण ने अपने ही सिर को धड से अलग कर दिया था तब शिवजी ने उनकी भक्ति देखि तो उससे शिवजी प्रसन्न होकर हर एक टुकड़े को एक सिर बना दिया जो उसके दस सिर थे.
image : jagran
● माना जाता है की रावण तीनो लोको का स्वामी था, रावण ने इंद्र लोक से लेकर भूलोक तक सभी को अपनी असुरो की ताकत से कब्ज़ा किये हुआ था.
● हिन्दू ज्योतिषशास्त्र में रावण संहिता को सबसे बड़ा महत्वपूर्ण ज्योतिष पुस्तक माना जाता है पर आपको ये बात पता है की इसकी रचना खुद रावण ने की थी.
● आप जानते है की रावण अपने समय का सबसे बड़ा विद्वान माना जाता है और रामायण में भी बताया गया है की जब रावण मृत्यु शैया पर लेता हुआ था तब राम और लक्ष्मण को उसके पास बैठ ने को कहा था ताकि वो जब भी मरे उससे पहले राजपाट चलने और नियंत्रण करने के गुर सिखा सके.
● रावण के कुछ चित्रों में आपने रावण को वीणा बजाते हुए देखा होगा, एक पौराणिक कथा के अनुसार रावण को संगीत का बहुत शौख था और वो वीणा बजने में भी माहिर था, ऐसा माना जाता है की रावण इतनी मधुर वीणा बजाता था की देवता भी उसका संगीत सुनने के लिए धरती पर आ जाते है.
image : patrika
● क्या आप जानते है की खुद शिवजी ने ही रावण को रावण नाम दिया था, ऐसा माना जाता है की रावण शिवजी को कैलाश से लंका ले जाना चाहता था पर पार्वतीजी राजी नहीं थी तब रावण ने कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया था, बाद में शिवजी ने अपना एक पैर कैलाश पर्वत पर रख दिया जिससे रावण की ऊँगली दब गयी. दर्द के मारे रावण चिल्लाने लगा पर शिवजी की ताकत को देखते हुए उसने शिव तांडव करना शुरू कर दिया. शिवजी को ये बात बहुत ही अजीब लगी की दर्द में होते हुए भी उसने शिव तांडव किया तो उसका नाम रावण रख दिया. रावण का अर्थ होता है “जो तेज आवाज में दहाड़ता हो”.
● लोगो का मानना है की लाल किताब का असली लेखक रावण है, पर ऐसा भी माना जाता है की जब रावण अपने अहंकार की वजह से अपनी सारी शक्तियों को खो बैठा था और उसने लाल किताब का प्रभाव भी खो दिया था पर बाद में अरब में ये किताब पायी गयी थी जिसको उर्दू और पारसी में अनुवाद किया गया था.
● जैसे की हम सभी जानते है की रावण एक बार बाली से पराजित हो चूका था, पर कुछ लोगो का ऐसा मानना है की बाली को सुरदेव का आशीर्वाद प्राप्त था और रावण शिव से मिले वरदान के अहंकार के कारण चुनौती दे बता था. जब की बाली ने शुरू शुरू में ध्यान ही नहीं दिया पर जब रावण ज्यादा परेशान करने लगा तो बाली ने रावण के सर को अपनी भुजाओ में दबा दिया और हवा में उड़ने लगा. बाद में रावण को बाली ने 6 महीने बाद ही छोड़ा ताकि वो सही सबक सिख सके.
● माना जाता है कि रावण रावण महिलाओ के प्रति बहुत जल्द ही आसक्त हो जाता था, रावण ने एक बार नालाकुरा की पत्नी को अपने वश में करने की कोशिश की तो वो स्त्री ने रावण को श्राप दे दिया की तुम अपने जीवन में किसी भी स्त्री को उसकी इच्छा के बिना कभी भी स्पर्श नहीं कर सकोगे और अगर ऐसा किया तो तुम्हारा विनाश हो जायेगा. यही कारण था की रावण ने सीता माता को कभी नहीं छु सका था.
image : ondiaindia
● हमने हमेशा से ही यह चुना है की रावण ने सीता का हरण किया था पर जैन ग्रन्थ की रामायण के अनुसार रावण सीता का पति था. पर हिन्दू धर्म के लोगो को ये बहुत ही अजीब बात लगीती है.
● क्या आप जानते है की रावण को दस सिरों की वजह से दशग्रीव भी कहा जाता है जो उसकी अद्भुद बुद्धिमता को दर्शाता है.
● रावण अपने समय में विज्ञान का भी बहुत बड़ा विद्वान् था क्यों की पुष्पक विमान से पता चलता है की उसे विज्ञान का कितना ज्ञान था.
● राम और रावण की बातचीत में एक बार राम ने रावण को महा-ब्राह्मण कह कर पुकारा था क्योकि रावल 64 कलाओ में निपुण था जिसके कारण उसे असुरो में भी सबसे ज्यादा बुद्धिमान व्यक्ति माना गया है.
● क्या आप जानते है की हमारे भारत के सबसे पुराने वाध्य यन्त्र वीणा की खोज भी रावण ने ही की थी.
● भारत, श्रीलंका में ऐसी कई सारी जगहे है जहा पर रावण की पूजा-अर्चना की जाती है.
● क्या आप जानते है की रावण और कुम्भकर्ण वास्तव में भगवान् विष्णु के द्वारपाल जय और विजय थे जसको एक ऋषि से मिले श्राप मिला की उनको राक्षस कुल में जन्म लेना पड़ेगा और अपने ही आराध्य से लड़ना भी पड़ेगा
● क्या आप ये अद्भूत बात जानते है की जब राम ने रावण को हराने के लिए समुद्र पार कर के लंका जाना था तब काम शुरू करने से पहले एक रात उन्होंने यज्ञ की तैयारी के लिए रामेश्वरम में भगवान् शिव की आराधना करने का निश्चय किया, तब सबसे शक्ति शाली व्यक्ति को हराने के लिए जा रहे थे. इसके लिए सबसे विद्वान् पंडित की आवश्यकता थी तब राम जी को जानकारी मिली की यहाँ पर रावण खुद ही एक बहुत बड़ा विद्वान पंडित है तब राम ने रावण को न्योता भेजा और रावण शिव जी का बहुत बड़ा भक्त था तो वो कैसे माना कर सकता था. जब रावण रामेश्वरम पंहुचा और यज्ञ पुरा किया. इतना ही नहीं यज्ञ पूरा हो जाने के बाद राम ने रावण से उसी को हराने के लिए आशीर्वाद माँगा और जवाब में रावण ने उनको “तथास्तु ” भी कह दिया था.
image : dharmik
● क्या आप जानते है की लंका का निर्माण खुद विश्वकर्मा जी ने ही किया था तब उस पर रावण के सौतेले भाई कुबेर का कब्जा हुआ करता था. जब रावण तपश्या करके लौटा तो उसने कुबेर से पूरी लंका ही छीन ली. ऐसा भी माना जाता है की रावण के राज में गरीब से गरीब का घर भी सोने का करवा दिया था. जिसके कारण उसको लंका नगरी में खूब ख्याति थी.
● क्या आप जानते है की दक्षिणी भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया के कई सारे हिस्सों में रावण की पूजा भी होती है और बहुत सारी संख्या में उसके भक्त भी है. कानपुर में कैलाश मंदिर हर साल में सिर्फ दशहरे के दिन ही खुलता है और यहाँ पर रावण की ही पूजा होती है. इसके आलावा राजस्थान और आंध्रप्रदेश के कुछ हिस्सों में भी पूजा जाता है.
दोस्तों आपको ये आर्टिकल कैसा लगा? आशा करता हु की रावण के बारे में आपको इस आर्टिकल से आपको गहराई से जानने को मिला होगा. जैसे की रावण में कुछ अच्छे भी गुण थे जब उनके दुर्गुणों की संख्या भारीमात्रा में बढ़ गयी तो उसका विनाश हो गया. इसलिए ही हमें अपने दुर्गुणों से दूर ही रहना चाहिए ताकि रावण की तरह हामारा भी विनाश ना हो.
ये सभी तथ्य अलग अलग स्त्रोतों से ये गये है जिससे इसमें त्रुटि की संबावना भी हो सकती है पर फिर भी आपको ये आर्टिकल पसंद आये तो हमें कमेंट करके जरुर बताये.

No comments:

Post a Comment

• अगर आप इस आर्टिकल के बारे में कुछ कहेंगे या कोई सवाल कमेंट में करेंगे तो हमें बहुत ख़ुशी होगी
• गलत शब्दों का प्रयोग न करे वरना आपका कमेंट पब्लिश नहीं किया जायेगा