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Thursday, 12 October 2017

Digital Kidnapping क्या है और इससे कैसे बचें

हल में ही दुनिया के सबसे बड़े साइबर अटैक को हम सभी ने देखा है और इनकी चपेट में दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनीयां और बड़े बड़े देश आ गये. ये अटैक हुआ था एक वायरस की वजह से जिसका नाम था WannaCry Ransomware जिसने पूरी दुनिया को कंपा दिया. जिसके पीछे का मूल कारण है डिजिटल किडनेपिंग.

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हमारे देश भारत में डिजिटल किडनेपिंग का पहला केस साल 2016 में देखने को मिला था. एक तरफ टेक्नोलॉजी हमारे जीवन को आसान बना रही है तो दूसरी तरफ मर्रे लिए मुश्किलें भी बढ़ा रही है. जिसमे डिजिटल किडनेपिंग एक ऐसी मुश्किल है जिससे हमारी समस्या दो गुना तक बढ़ जाती है. इसमें शिकार हुए लोगो और कंपनीज के पास से एक ऑनलाइन करेंसी फिरोती के तौर पर मांगी जाती है जिसका नाम है बिटकोइन.

image : bitcoin

आज हम आपको इस आर्टिकल में डिजिटल डिजिटल किडनेपिंग क्या होती है और इससे कैसे बचे के बारे में बात करने वाले है.

डिजिटल किडनेपिंग क्या है

डिजिटल किडनेपिंग का मतलब होता है आपकी कंप्यूटर आधारित पहचान और दस्तावेजो की चोरी करना. अगर देखा जाए तो डिजिटल किडनेपिंग भी एक तरह से हैकिंग का ही तरीका है जिसमे हैकर आपकी पहचान, जरुरु दस्तावेज, जरुरी जानकारी या यु कहे तो गुप्त फाइल्स जो हमारे बहुत काम की होती है उसको चुरा लेते है. या फिर आपको कंप्यूटर को लॉक भी कर देते है, बदले में आपके पास से इसकी फिरोटी के तौर पर पैसे की मांग करने लगते है. अगर साफ शब्दों में कहे तो वो आपके जरुरी दस्तावेजो को चुराकर उसको वापिस करने के बदले में आपसे पैसे की मांग करते है.

अगर आपने उसकी मांग को पूरी नहीं की तो वो आपकी पहचान का इस्तेमाल करके इन्टरनेट पर क्राइम करते है और वो भी आपकी पहचान पर तो इस तरह की क्राइम एक्टिविटी को डिजिटल किडनेपिंग कहा जाता है.

खतरा क्या होता है डिजिटल किडनेपिंग का

अगर कोई कंपनी को डिजिटल किडनेपिंग का खतरा है तो आपको भी उनके जितना ही खतरा है. पर आप बोलेंगे की मेरे कंप्यूटर में तो ऐसी कोई भी फाइल्स नहीं है जिससे मुझे खतरा हो सकता है, पर ये आपको बहुत बड़ी गलती हो सकती है क्युकी आप को इन्टरनेट की आदत है एयर आप इन्टरनेट से सोंग्स, मूवीज, या तो कोई ना कोई सॉफ्टवेर तो जरूर डाउनलोड करते है तो आपका कंप्यूटर बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है. अगर आप किसी अनजान साईट पर से या टोरेंट से कोई भी चीज डाउनलोड करते है या किसी क्रैक सॉफ्टवेर डाउनलोड करके उसका इस्तेमाल करते है तो आपका कंप्यूटर बिलकुल भी सुरक्षित नहीं है क्यों की उन फाइल के साथ साथ कोई मैलवेयर या रेंसोमवेर भी उसके साथ साथ इनस्टॉल हो सकता है जिसकी भनक तक आपको नहीं लगेगी और वो आपकी गोपनीय फाइल को चुराकर अपने मालिक को भेजता रहेगा.

image : simplilearn

ज्यादातर टोरेंट्सवेबसाइट्स सबसे ख़तरनाक मानी जाती है क्योकि इसमें कोई भी व्यक्ति अपना कंटेंट अपलोड कर सकता है इसमें कोई भी हैकर भी अपना बनाया हुआ प्रोग्राम भी अपलोड कर सकता है. अगर ऐसा कोई भी खतरा आपके कंप्यूटर में आ गया तो हैकर आपकी सभी साईट की लॉग इन डिटेल्स भी देख सकता है और उन्हें एक्सेस भी कर सकता है. अगर आपने हैकर को पैसा भी दे दिया तो उसकी क्या गेरेंटी है की वो आपकी कोई भी फाइल का गलत इस्तेमाल नहीं केरगा.

डिजिटल किडनेपिंग से कैसे बचे
  • अपने कंप्यूटर के एंटीवायरस को हमेशा अपडेट रखे.
  • अपनी कंप्यूटर की विंडोस को अपडेट करते रहे.
  • अपने विंडोज के फ़ायरवॉल को कायम के लिए चालू रखे ताकि वो सही से काम कर सके.
  • इन्टरनेट पर भरोसे वाली साईट को ही एक्सेस करे.
  • कोई भी टोरेंट या कोई भी ऐसी वेसी वेबसाइट से कुछ भी डाउनलोड ना करे.
  • कोई भी अनजान ईमेल को कभी भी ना खोले.
  • कोई भी पिशिंग ईमेल को ना खोले और ना ही दी गयी लिंक पर क्लिक ना करे.
  • इन्टरनेट को सर्फ करते समय कोई भी प्रकार के लुभावने विज्ञापन और लौटरी जैसी लिंक पर भूलकर भी क्लिक ना करे.

आपको ये जानकारी कैसी लगी ?
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