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Wednesday, 25 October 2017

क्या आप भी शारीरिक शक्ति बढ़ाना चाहते है तो अपनाइए चाणक्य की ये नीति

अच्छी सेहत कौन नहीं चाहता, कुछ चीजे ऐसी भी होती है जिसको आरोगने से हमारे शरीर में भरपूर मात्रा में उर्जा प्राप्त होने लगती है. जब हम अन्न, दूध, सब्जिया, घी आदि ग्रहण करते है तो ये सब भारी मात्रा में आने ताकत देते है. पर हर किसी चीज खाने से अलग-अलग उर्जाए प्राप्त होती है.
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पर आज हम आपसे बात कर रहे है आचार्य चाणक्य ने जो अपनी नीति में बताया है उसकी जिसकी मदद से आपके शरीर को कभी अच्छा फायदा होगा.
आटे से दस गुना अधिक बल होता है दूध में
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आचार्य ने इस नीति में कहा है की हम आटे से बनी हुई कोई भी चीज खाते है तो उससे 10 गुना ज्यादा बल दूध खाने में होता है. इसमें भैस के दूध से कई गुना बेहतर है गाय का दूध. अगर हम गाय के दूध का सेवन करते है तो इससे हमें रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है. दूध पुरुष और स्त्री दोनों को एक ही समान लाभ देता है.
दूध से आठ गुना बल होता है मांस में
आचार्य का कहना है की दूध तो हमें बल देता ही है पर मांसाहार हमें दूध से आठ गुना ज्यादा बल देने वाला होता है. अगर शास्त्रों की माने तो मांसाहार प्रकृते के विरूद्ध माना गया है और किसी भी जिव की हत्या करना महा पाप माना गया है. इसीलिए हमें मांसाहार से बचनाचाहिए पर आचार्य चाणक्य के अनुसार मांसाहार को अधिक बल देने वाला माना गया है. इसीलिए आचार्य ने बताया है की मांसाहार से भी एक शाकाहारी चीज अधिक बल देने वाली होती है तो उसका ही सेवन करना चाहिए.
मांसाहार से भी अधिक दस गुना बल होता है घी में
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आचार्य चाणक्य के अनुसार मांसाहार से भी ज्यादा दस गुना ताकत देने की क्षमता रखता है घी, ये सभी पॉवर गाय के दूध से बने हुए घी में होता है. घी हमारे शरीर को बल और पौष्टिकता प्रदान करता है. अगर कोई भी इंसान लम्बे समय तक घी का सेवन करता है तो उसका बुढ़ापा लम्बे समय तक नहीं दीखता.
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