महात्मा गाँधी जो हमारे राष्ट्रिय पिता है जिन्होंने हमारे देश के लिए क्या कुछ नहीं किया. क्या आपको पता भी है की महात्मा गाँधी खुद नहीं चाहते थे की उनकी फोटो कही पर भी छापी जाये. पर तब से लेकर आज तक महात्मा गाँधी की ही तस्वीरे ही आज तक सबसे ज्यादा देखि जाती है, यहाँ तक की सभी नोटों पर भी गांधीजी की ही फोटो होती है. आज हम आपको बताते है की ये सब कहा से शुरू हुआ और क्यों हुआ.
Leftover Currency
साल 1966 से ही गांधीजी की फोटो छप रही है नोटों पर
रिजर्व बैंक के मुताबिक, साल 1996 में गांधीजी वाले नोट चलन में आने लगे , इसके बाद 5,10,20,100,500 और 1000 रुपए वाले नोट भी छापे गए. नोट पर अशोक स्तंभ की जगह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की फोटो और अशोक स्तंभ की फोटो नोट के बाईं तरफ निचले हिस्से पर प्रिंट करने जाने लगी थी.
साल 1996 से पहले का नोटों का इतिहास
साल 1987 में महात्मा गांधी की तस्वीर को वाटरमार्क के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जो नोट के बाईं तरफ दिखाई देते थे.
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जाने आखिर क्यों छापी जाती है गांधी जी की तस्वीर
एक आरटीआई के जवाब में बताया गया कि साल 1993 में रिजर्व बैंक ने नोट के दाहिनी तरफ महात्मा गांधी की तस्वीर छापने की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी पर हमेशा से एक बात पर बहस होती आई है कि गांधी जी की तस्वीर की जगह अन्य स्वतंत्रता सेनानियों की तस्वीर क्यों नहीं छापी गई ये मामला बड़ा ही पेसिदा होते चला गया.
गांधी जी की फोटो छापने के पीछे का कारण
जैसे की हम सभी जानते है की महात्मा गांधी को राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में माना जाता है, गाँधी जी राष्ट्रपिता की उपाधि हासिल कर चुके थे तो महात्मा गांधी ही उस वक्त राष्ट्र का चेहरा थे, इसी कारण नाम पर फैसला लिया गया था की अब से महात्मा गाँधी की ही फोटो नोट पर छापी जाएगी.








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नोट पर छपने वाली गांधी जी की फोटो कब ली गई
महात्मा गाँधी की फोटो नोटों पर छपने वाली यह तस्वीर तस्वीर 1946 में खिंची गई थी और ये असली तस्वीर ही है. यह फोटो उस वक्त खींची गई थी जब गांधी जी लार्ड फ्रेडरिक पेथिक लॉरेंस विक्ट्री हाउस में आए थे.