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Saturday, 11 November 2017

ताजमहल से जुडी रोचक जानकारी, जिसे आप अब तक नहीं जानते

हम सभी ताजमहल को प्यार की निशानी मानते है, जो हमारी दुनिया के सात अजूबो में से एक है. आज हम सभी जानते है की ताजमहल किसने बनाया और क्यों बनाया पर आज हम आपको ताजमहल के बारे में कुछ ऐसी रोचक बातें बताने वाले है जो आपने पहले कभी भी जानी ही नहीं होंगी. तो आइये जानते है ताजमहल के बारे में रोचक जानकारी.

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ताजमहल से जुडी रोचक जानकारी
क्या आप जानते है की मुमताज महल की समाधि के ऊपर मुख्य हॉल की छत पर एक छोटा सा छेद किया हुआ है. कहानियों के अनुसार यह छेद उत्कृष्ट कृति बनाने वाले एक कारीगर का काम था जिसने शाहजहां के सपने को तोड़ने का निर्णय कारीगरों के हाथ काटने वाले फैसले की जानकारी के बाद लिया था.
एएसआई ने सेकंड वर्ल्ड वार के दौरान हमलावरों को गुमराह करने के लिए एक विशाल चबूतरे का निर्माण करवाया था जो ताज को छुपाने के लिए किया गया था. 20वीं सदी में साल 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय और 9/11 हमले के बाद बांस का बम्बू बना कर इसे हरे कपड़े से कवर करके संरक्षित रखने का प्रयास भी किया गया था.

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क्या आपको पता है शाहजहां ने पहली बार ताज को देखते हुए इसकी तारीफ़ में कहा था कि उनका यह ताजमहल सिर्फ एक प्यार को ही बयान नही करेगा बल्कि पापियों के पिछले पाप से दोषरहित भी बनाएगा जिसकी नुमाइंदगी सूरज और चाँद की आँखें ही करेंगी.
क्या आप जानते है की ताजमहल के निर्माण को लेकर एक बात सबसे अधिक प्रचलित रही है और वह यह है कि शाहजहां ने सभी कारीगरों के हाथ काट लिए थे पर जब इतिहास पर नजर डाले तो यह एक मिथक लगता है क्योकि ताज महल निर्माण टीम का नेतृत्व कर रहे वास्तुकार टीम के नेता आर्किटेक्ट उस्ताद अहमद लाहौरी ताज के बाद लाल किले की नींव रखी थी इसका मतलब है की वह ताज के बाद भी परियोजनाओं पर काम करते रहे है तो अब आप समज ही गये होंगे.
जब आप ताज की चारों मीनारों को ध्यान से देखेंगे तो चारो मीनार बाहर की तरफ झुके हुए नजर आयेंगे ऐसा मीनारों और मुख्य गुंबद को भूकंप जैसी आपदाओं से बचाने के लिए ही किया गया है.
क्या आप जानते है की भारत के सबसे बड़े ठग की उपाधि से मशहूर नटवरलाल ने ताजमहल को मंदिर बता कर बेच दिया था. नटवरलाल बिहार के थे और आज उनके पैतृक गांव में कुछ लोग स्मारक के रूप में एक मंदिर बनवाने का फैसला भी ले चुके है.
ताजमहल का सारा आधार ताज के नीचे लगी ऐसी लकड़ीयों पर ही टिका हुआ है जिसे हर समय नमी की आवश्यकता पड़ती है और लकड़ीयों की यह जरूरत यमुना नदी पूरी करती है यदि यमुना नदी का बहाव ताज के करीब ना होता तो सुंदर ताज शायद ही टिक सकता था.
क्या आप जानते है की र्लभ, अर्द्ध कीमती कीमती और बेशकीमती जैसे करीब 28 प्रकार के पत्थरों का इस्तेमाल करके ताजमहल का निर्माण किया गया था और इन पत्थरों को श्रीलंका, तिब्बत, चीन और भारत के कई स्थानों से एकत्रित किया गया था ऐसा भी माना जाता है की इन पत्थरों को रौशनी इतनी तेज थी की देखने वाली की ऑंखें चौंधिया जाती थी लेकिन ब्रिटिश शासन के दौरान इन पत्थरों को निकाल दिया गया था.

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ताजमहल की लंबाई की तुलना अगर कुतुब मीनार से की जाएं तो ताजमहल कुतुब मीनार से करीब पांच फुट लंबा है.
ये एक चौकाने वाला आंकड़ा है की वर्ष 1632-1653 के दौरान शाहजहां ने ताजमहल बनाने के लिए लगभग 32 लाख रुपये खर्च किये थे जिसकी आज कीमत लगभग 10, 628, 34098 अमरीकी डॉलर है.
ताजमहल के सभी फव्वारे नीचे से तांबे टैंक के साथ सीधे ही जुड़े हुए है और सभी फव्वारे के नीचे अलग-अलग उनकी अपनी तांबे की टैंक भी लगी हुई है. ताजमहल फव्वारे की सबसे बड़ी खासियात यह है की सभी पानी के दबाव टैंक को आकार में बनाए रखते है और सभी फव्वारे एक ही समय पर एक साथ चलते रहते है.
क्या आप ये रोचक बात जानते है की 8 नवंबर 2000 में ऑप्टिकल भ्रम पैदा करके जनता की आँखों से ताज को गायब कर दिया गया था.
क्या आप जानते है की 12,000 दर्शकों के हर दिन दुनिया के सात आश्चर्यों में से एक प्यारे ताज को देखने के लिए आते है.
शाहजहां पत्नी मुमताज की याद में बनाए गये ताज महल के बाद खुद के लिए एक मकबरे के रूप में काले ताजमहल का निर्माण करना चाहते थे और उन्होंने इसका काम शुरू भी किया था लेकिन बेटे औरंगजेब द्वारा उन्हें सत्ता से बेदखल करने के बाद उस काम को पूरा नही किया जा सका.

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क्या आप जानते है की जॉर्ज हैरिसन का नाम ताज के बाहर पहली सेल्फी लेने के लिए जाना जाता है इस काम के लिए जॉर्ज हैरिसन ने मछली की आँख लेंस का प्रयोग किया था.
क्या आप जानते है की ताज का रंग उस पर पड़ने वाली रौशनी के अनुरूप बदल जाता है इसलिए ताज सुबह के समय देखने में गुलाबी शाम को दूधिया सफेद और रात को सुनहरे चांद की तरह नजर आता है.
क्या आप जानते है की शाहजहां की बेटी जहांआरा बेगम ताज की तरह भव्य दफन होने से इंकार कर दिया था.
ग्रेमी पुरस्कार विजेता अमेरिकी हेनरी सेंट क्लैर फ़्रेड्रिक्स ने मंच के लिए खुद को ताजमहल का ही नाम दे दिया था.

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