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Tuesday, 9 January 2018

मकर संक्रांति के बारे में 6 रोचक बातें, जरुर जाने

जैसे की हम सभी जानते है भारत एक ऐसा देश है जिसमे लोग हर तौहार को साथ में मिलकर बेहद ही ख़ुशी से मनाते है, ठीक वैसा ही एक तौहार आने वाला है मकर संक्रांति, जी हा दोस्तों ये तौहार पौष शुक्ल पक्ष में आता है. ये तौहार पुरे भारत वर्ष में मनाया जाता है साथ ही नेपाल में भी मुख्य फसल कटाई के एक तौहार के रूप में मनाया जाता है.
क्या आप जानते है पंजाब और हरियाणा में तो एक दिन पहले मतलब की 13 जनवरी को ही लोहड़ी के रूप में मनाया जाता है. इस दिन लोग दान करते है, जिसमे पैसो के साथ साथ तिल और गुड के पकवान का भी दान किया जाता है. इस दिन लोग पतंग उड़ाते है. आप ये सभी बातें जानते होंगे पर आज हम आपको मकर संक्रांति के बारे में कुछ बेहद ही रोचक बातें बताने वाले है जो आपको पता भी नहीं होंगी. तो आइये जानते है क्या है वो रोचक बातें.
मकर संक्रांति क्यों कहते हैं?
क्या आपको पता है मकर संक्रांति पर्व को “सूर्य पर्व” के नाम में भी मनाया जाता है, इस दिन सूर्य धनु राशी को छोड़ कर मकर राशी में प्रवेश करता है. इसीलिए सूर्य की एक राशी को छोड़ कर दूसरी राशी में प्रवेश करने की क्रिया को संक्रांति कहा जाता है बात रही मकर की तो सूर्य इस दिन मकर राशी में प्रवेश करता है इसीलिए “मकर संक्रांति” कहा जाता है.
सूर्य उत्तरायण
क्या आप जानते है इस दिन सूर्य अपनी दक्षिण दिशा को छोड़ कर उत्तर दिशा में जाता है, मतलब की इस दिन से सूर्य उत्तर दिशा की और बढ़ने लगता है. इसी दिन से दिन की लंबाई बढ़ने लगती है और रात की लंबाई छोटी होनी शुरू हो जाती है. हमारे देश भारत में इस दिन से ही बसंत ऋतु की शुरुआत हो जाती है. सूर्य के उत्तर दिशा में जाने के कारण ही मकर संक्रांति को “उत्तरायण” के नाम से भी जाना जाता है.
स्नान, दान, पूजा
ऐसा भी माना जाता है की इस दिन भगवान सूर्य अपने पुत्र शनिदेव से नाराजगी त्यागकर उनके घर पर गये थे. इसीलिए इस दिन को सुख और समृद्धि का दिन माना जाता है, इस दिन पवित्र नदी के अंदर स्नान, पूजा, दान आदि किया जाता है. ऐसा भी माना जाता है की इस दिन किया हुआ दान एक हजार गुना पुण्य बढ़ा देता है.
तिल और गुड़
इस वक्त शर्दी बहुत तेज होती है तो ऐसे ठंडे वातावरण में तापमान बहुत कम होता है इसी वजह से रोग और बीमारिया बढती रहती है. इन दिनों में गुड और तिल से बने मिष्ठान बनाये और खाए जाते है जिससे शरीर में गर्मी पैदा होती है जो शरीर के लिए काफी लाभदायक होती है.
पतंग महोत्सव
जैसी की हम सभी ऐसा करते है सुबह के सूर्य के आने से पहले ही हम पतंग उड़ना शूरू कर देते है, पर क्या आपको पता है पतंग उड़ाने का मुख्य कारण क्या है? अगर नहीं तो हम आपको बता देते है की पतंग उड़ाने के पीछे कारण है की कुछ घंटे सूर्य के प्रकाश में बिताना. यह समय सर्दी का होता है इसीलिए सुबह के समय सूर्य की किरणे हमारे शरीर पर पड़ती है तो शरीर एकदम स्वस्थ रहता है और ये हड्डियों और त्वचा दोनों के लिए फायदाकारक है.
फसलें लहलहाने का पर्व
जैसे की हम सभी जानते है हमारे देश भारत और पडोशी देश नेपाल में फ़सलो के आगमन की ख़ुशी के रूप में मनाया जाता है. ये दिन आने से पहले खरीफ की फसले भी कट चुकी होती है और पुरे खेतो में रबी की फसलें लहरा रही होती है. इस दिन पुरे देश में खुशियों का माहोल बना होता है, इस दिन हर राज्य में अपने तरीको से इस तौहार को मनाया जाता है. दक्षिण भारत में भी इस तौहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है वही उत्तर भारत में इसे लोहड़ी कहा जाता है, मध्य भारत में इसे संक्रांति के नाम से जाना जाता है. इसके अलावा मकर संक्रांति को और नाम से भी जाना जाता है जैसे की उत्तरायण, माधी, खिचड़ी आदि नाम से भी जाना जाता है.

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