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Thursday, 25 January 2018

गलती से भी इस वक्त श्मशानघाट के पास से ना गुजरें

हमारे शास्त्रों के हिसाब से ऐसी मान्यता है की गंगा जैसी पवित्र नदी का जल पिने से या नहाने से हमारे सभी पाप धुल जाते है सिर्फ इतना ही नहीं दाह संस्कार के बाद भी अस्थियों को राख के रूप में गंगा में प्रवाहित कर दिया जाता है.
ऐसी भी मान्यता है की इंसान की अस्थियाँ कुछ वर्षो तक गंगा नदी में रहती है और गंगा नदी उन अस्थियों के माध्यम से धीरे-धीरे पाप को ख़त्म करती है. बाद में उन सभी आत्माओं के लिए एक नया मार्ग खोलती है.
 जैसी की हम सब जानते है हमारे हिन्दू धर्म में अंतिम संस्कार नदी के किनारे किए जाते है, ऐसे स्थानों को हम श्मशान घाट के नाम से जानते है जहा पर शवों को लाकर उनका दाह संस्कार किया जाता है.

कुछ लोगो का ऐसा भी मानना है की अंतिम संस्कार के बाद भगवान शिव मृतक को अपने शरीर के अंदर समाहित कर लेते है और कोई मानव अपनी उपस्थिति से इस प्रक्रिया में बाधा पहुचाता है तो उन्हें माँ काली के प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है.
ऐसा भी माना जाता है की श्मशान घाट पर आत्माओ, भुत-प्रेतों का स्थान होता है, ऐसे स्थानों पर रात के समय अघोरी भी होते है, इसीलिए हमें शाम होने के बाद और सूर्योदय होने तक वहा पर नहीं जाना चाहिए.

हिन्दू शास्त्रों में भी ऐसा कहा गया है की दिन के समय में भी कोई भी इंसान को श्मशान घाट में कभी नहीं घूमना चाहिए, ऐसा करने से बुरी आत्माएं सक्रीय हो जाती है और बाद में इंसान उस आत्मा से या नकारात्मक शक्ति से लड़ सके उतने सक्षम नहीं रहते.
शास्त्रों में भी कहा गया है की नकारात्मक शक्तिया बहुत ज्यादा प्रभावी होती है और ये सभी शक्तिया मानसिक रूप से कमजोर किसी भी इंसान के उपर हावी हो सकती है, हमारे विज्ञान का भी ऐसा मानना है की कोई आदमी भावनात्मक रूप से कमजोर हो तो नकारात्मक शक्ति उन पर तुरंत ही हावी हो सकती है.
अगर कोई इंसान की मृत्यु हो जाती है तो उसके शव को 9 घंटे के अंदर ही श्मशान घाट पर ले जाकर उनका अंतिम संस्कार कर देना चाहिए. अगर कोई इंसान की मौत रात के समय हुई है तो उसका अंतिम संस्कार 9 नाजीगई (1 नाजीगई-24 मिनट) में किया जाना चाहिए.

क्या आप जानते है श्मशान घाट भगवान शिव का और माँ काली का घाट भी कहा जाता है, क्युकी यहाँ पर भगवान शिव ध्यान में बैठे हुए होते है और माँ काली बुरी आत्माओं का पीछा करती है.
क्या आपको पता भी है की अगर यम गलती से किसी आत्मा को ले जाते है तो उन्हें वापस पहुचाने की शक्ति भी रखते है ऐसे में अंतिम संस्कार करने में कोई भी जल्द बाजी नहीं करनी चाहिए.
अगर कोई पति को पता होता है की उनकी पत्नी गर्भवती है तो उसको उस समय अंतिम संस्कार की प्रक्रिया से दूर रहना चाहिए और उनको श्मशान घाट भी नहीं जाना चाहिए.
क्या आप जानते है किसी की मौत अगर दक्षिणायन, कृष्ण पक्ष, रात्रि में हुई हो तो उसको दोष माना जाता है, इसीलिए शव जलाने से पहले ब्राह्मणों, रिश्तेदारों को भोजन करा के और व्रत या दान-पुण्य करने के बाद इस दोष का निवारण हो जाता है.
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