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Tuesday, 13 February 2018

होली से जुड़ी रोचक और अनसुनी बातें

होली को रंगों और खुशियों का तौहार कहते है, इस दिन लोग हर्षोल्लास के साथ इस तौहार को मनाते है, माना जाता है इस तौहार पर दुश्मन भी गले लग जाते है. आज हम आपको होली के बारे कुछ रोचक और अदभूत बातें बताने वाले है जो आपको पता भी नहीं होंगी.
होली के बारे में रोचक और अदभूत बातें
होली हिन्दू पंचांग के मुताबिक फाल्गुन मास की पूर्णिमा को ही मनाई जाती है.
होली दो दिनों का तौहार होता है, एक दिन होलिका दहन होता है और दुसरे दिन रंगों से खेला जाता है, भारत के कुछ राज्यों में होली के दुसरे दिन को धुलेटी, धुरखेल, धूलिवंदन उया धुरड्डी भी कहा जाता है, होली के दिन लोग रंगों से खेलते है नाचने-गाने के साथ.
क्या आप जानते है होली को फाल्गुन मास में मनाने के कारण इसे फाल्गुनी के नाम से भी जाना जाता है.
होली के दिन किसान को बेहद ही ख़ुशी होती है क्योकि इस समय में फसल पाक चुकी होती है और सर्दी भी जा चुकी होती है.
क्या आप जानते है कवियों और साहित्यकारों ने होली को मस्ती का तौहार की उपमा दी है.
क्या आप जानते है होली का पर्व भारत देश में काफी पहले से ही मनाया जाता है, माना जाता है की प्राचीन साहित्यों में भी मुस्लिम पर्यटक अलबरूनी ने इस ऐतिहासिक यात्रा में भी होलिकोत्सव का वर्णन किया था.
क्या आप जानते है मुग़ल काल में भी होली के किस्से मौजूद थे, जब अकबर का जोधाबाई के और जहाँगीर का नूरजहाँ के साथ होली खेलने का वर्णन हमें मिलता है.
क्या आप जानते है शाहजहाँ के समय में भी होली को आब-ए-पाशी या ईद-ए-गुलाबी के नाम से जाना जाता था.
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इन सभी में भक्त प्रह्लाद की कहानी जाकर सही बैठती है, प्रह्लाद के पिता हिरण्यकश्यप एक राक्षस थे, जो अपने आप को भगवान मानने लगे थे और जो भी कोई इसका विरोध करता उसका वो तुरंत ही वध कर देते है. पर जब उनके बेटें प्रह्लाद ने ही इस बात का विरोध किया तो उन्होंने अपनी बहन होलिका से कहा की तुम प्रह्लाद को आग में लेकर बैठ जाओ, दर्ह्सल होलिका को एक वरदान मिला था जो कभी भी आग में जल नहीं सकती. पर जब होलिका प्रह्लाद को लेकर आगमे बैठी तो वो वरदान होने के बावजूद भी खुद जल गयी और प्रह्लाद बच गया. तभी से होलिका-दहन किया जाने लगा.
कुछ लोगो का मानना है की भगवान श्री कृष्ण ने इसी दिन ही पूतना नाम की राक्षसी संहार किया था.
क्या आप जानते है कुछ लोगो का ऐसा भी मानना है की होली का रंग लगाकर लोग नाच-गान करके शिव के गणों का वेश भी धारण करते है.
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