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Friday, 18 May 2018

विशेष : हनुमानजी को इतनी शक्ति कहा से मिलती है, हनुमान भक्त जरुर जाने

महावीर हनुमान जी ने एक वानर यो*नी में जन्म लिया फिर भी वह एक अवतारी पुरुष रहे और सदा के लिए अमर रहने वाली साथ दिव्य विभूतियों में से एक है. हनुमान जी के आलावा बाकि छह में अश्वत्थामा, वेद व्यास, विभीषण, बली, परशुराम और कृपाचार्य यह अवतारी पुरुष है और इनका कभी भी नाश नहीं हो सकता.

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इन सभी में से एक हनुमान जी ही ऐसे है जो इतर यो*नी के थे, इनका जन्म ही श्रीराम की सहायता करने के लिए हुआ था. हनुमान जी का जन्म चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती के नाम से मनाया जाता है.
हनुमान जी को अतुलित महाबली के रूप में माना जाता है यानि की इसके बल की कोई भी सीमा नहीं है, हनुमान जी ने ही रावन और मेघनाद जैसे योद्धा को धुल चटाई थी. अब सवाल यह उठता है की हनुमान जी के पास इतनी शक्ति कहा से आती है. इसका सीधे सीधा जवाब उनकी स्तुति के एक पद में दिया गया है "अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता अस बर दीन्ह जानकी माता।" इसी दोहे में इनकी शक्ति का राज छुपा हुआ है.

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हनुमान जी रूद्र के अवतार थे और सूर्य के शिष्य, भगवान सूर्य नारायण से ही इन्होने आठ सिद्धियां पायी थी. यही इनकी शक्ति का स्त्रोत माना जाया है. इन्ही के बल पर हनुमान जी पूरी दुनिया को अपने मुठ्ठी में सामने का सामर्थ्य रखते है.
आज हम आपको उनकी आठ सिद्धियां के बारे में बताने वाले है जिसका कोई जवाब नहीं. पहली है अणिमा जिसका मतलब होता है मनचाहा विस्तार देने की क्षमता, दूसरा है लधिमा जिसका मतलब होता है छोटा और बलवान रूप लेने की क्षमता, तीसरा है गरिमा इससे शरीर को अपने हिसाब से जितना भारी बनाना हो बना सकते है, चौथा है प्राप्ति यह सिद्धि के कारण ही हनुमान जी परम संतोषी हुए और राम के द्वारा दिए गये मोती भी कंकड़ के समान लगे.

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पांचवी है प्राकाम्य इस सिद्धि से व्यक्ति जो भी कामना करता है वह जल्द ही पूरी हो जाती है, छठी है महिमा इस सिद्धि से व्यक्ति अपने महत्ता कही पर भी साबित करवा सकता है, सांतवी है ईशित्व इस सिद्धि की मदद से व्यक्ति ईश्वरत्व को पा लेता है और प्रभु भजन करने की सही शक्ति आ जाती है इसी के कारण हनुमान जी पूरी दुनिया के आराध्य है और पूज्य बन सके है, आंठ्वी है वशित्व सिद्धि इसकी मदद से व्यक्ति किसी को भी अपने वश में कर सकता है.

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वैसे हनुमान जी सदा के लिए ब्रह्मचारी रहे पर शास्त्रों में हनुमान जी के विवाह की भी कई कहानियां मिलती है, पर आपको जानकारी के लिए बतादे की हनुमान जी ने वैवाहिक सुख पाने के लिए विवाह नहीं किया था बल्कि उन चार प्रमुख की प्राप्ति के लिए विवाह किया क्यूंकि उन विद्याओं का ज्ञान सिर्फ विवाहित व्यक्ति को ही मिल सकता है, पुराणों के अनुसार बाकि चार विद्याओं को सिखने के लिए हनुमाज जी को सूर्य ने विवाह के लिए कहा और कहा की यह चार विद्या सिर्फ विवाहित व्यक्ति सी सिख सकता है तब हनुमान जी ने सूर्य की पुत्री सुवर्चला से विवाह कर लिया, जब उनको चार विद्याओं का ज्ञान प्राप्त हो गया तो उन्होंने वह संबंध छोड़ दिया.
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