यहाँ पर आज भी उपस्थित है संजीवनी पर्वत

आज हम आपको रामायण से जुड़े एक प्रसंग के बारे में बताने वाले है जिसके बारे में आपको अभी तक जाना नहीं होंगा. हम सभी को पता है की भगवान श्री राम को लक्ष्मण ने हर जगह और हर वक्त साथ दिया था. जब श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण जब मरणावस्था में थे तो उसे देखकर भगवान श्री राम की आँखों में आँसू आ गये थे.

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ऐसा देख हनुमानजी को बहुत ही दुःख हुआ और वो लंका में जाकर शूरसेन नाम के एक वैद्य को लंका से उनके घर समित उठाकर ले आये थे. जब वे लक्ष्मण जी के पास आये तो उसने जांस करने के बाद कहा की लक्ष्मणजी के प्राण बचाने के लिए हिमायल पर्वत पर जाकर वहा से जड़ी बूटियां लानी होंगी जिससे लक्ष्मणजी के प्राण बच सकते है.

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अब लक्ष्मणजी के प्राण बचाने के लिए हनुमानजी भगवान श्रीराम की आज्ञा लेकर संजीवनी बूटी को लाने के लिए हिमालय पर्वत की औ चल दिए.

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यह पहाड़ आज के ज़माने में श्रीलंका के सुदूर इलाके में श्रीपद नामक जगह पर मौजूद है. इसी जगह पर द्रोणागिरी एक टुकड़ा पाया गया था. हनुमानजी हिमालय पर्वत से लेकर आये थे उसी पर्वत को संजीवनी बूटी के नाम से जाना जाता है. इसीलिए हनुमानजी ऊस दिव्य पहाड़ के एक टुकड़े को उठाकर ले आये थे.
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