एक सीधी सादी पंजाबन लड़की कैसे बन गयी राधे माँ, जाने पूरी हकीकत

एक सीधी सादी 10वीं पास पंजाबन लड़की जिनकी सिर्फ 18 साल की उम्र में ही शादी हो गयी, बाद कुछ ऐसा हुआ की वो खुद को देवी बताने लगी और एक विवादास्पद और ग्लैमरस धर्मगुरु राधे मां बन गई. ऐसा कैसे हुआ आईये जानते है.

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राधे माँ का असली नाम सुखविंदर है, राधे माँ की शादी पंजाब के एक हलवाई के बेटे से शादी हुई जिनका नाम मोहन सिंह था. इनकी शादी 18 साल की उम्र में ही हो गयी थी. जब सुखविंदर की शादी हुई तब उनके ससुरालवालों की आर्थिक हालात ठीक नहीं थी, जब सुखविंदर 22 साल की हुई तब उनको करीब छह बच्चे भी हो चुके थे.

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सुखविंदर अपने पति की आर्थिक सहायता करने के लिए कपडे सिलाई का काम करने लगी बाद में उसका पति पैसा कमाने के लिए दोहा चले गये जो की क़तर की राजधानी है, जब उनका पति कतर चला गया तो सुखविंदर आध्यात्मिकता की और मुड़ी और महंत रामदीन की शिष्या बन गयी.

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इन्ही महंत ने सुखविंदर को राधे माँ का नाम दे दिया और इसके बाद राधे सभी संत समागमो में भाग लेने लगी और लोगो से अपनी जान पहचान करने लगी.
अब राधे माँ मुंबई में कुछ साल रही और बाद में पंजाब की और अपना रुख किया वहा पर उनके बेहद ही ज्यादा संख्या में शिष्य बनने लगे. अब राधे अपने पति और अपने दो बच्चो को मुंबई ले गयी फिर पंजाब में आकर अपने शिष्यों से मिलने लगी.
जब राधे माँ के शिष्य काफी बड़ी मात्रा में हो गये तो उन्हों ने मुंबई के एक गुप्ता परिवार ने प्रचार कर के राधे दर्शन कराना शुरू कर दिया, अब पुरे जोर शोर से राधे माँ का देवी बनकर लोगो को दर्शन देने का धंधा चल पड़ा. तो यही थी सुखविंदर से राधे माँ बनने की पूरी कहानी.
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