पांडवों ने बनाया था द्रौपदी को लेकर यह नियम, जरुर जाने

आपको बतादें की द्रौपदी से विवाह के बाद एक दिन नारद मुनि जब पांडवों से मिलने आए तो उन्होंने पांडवों को बताया कि प्राचीन समय में सुंद-उपसुंद नामक दो राक्षस भाई थे और उन्होंने अपने पराक्रम से देवताओं को भी जीत लिया था, पर एक स्त्री के कारण दोनों में फूट पड़ गई. इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे का वध कर दिया, ऐसी स्थिति तुम्हारे साथ न हो इसलिए कोई न कोई नियम बनाओ ऐसा नारद मुनि का कहना था.


Third party image reference
बाद में पांडवों ने एक नियम बनाया कि द्रौपदी एक नियमित समय तक एक भाई के पास रहेगी, जब एक भाई द्रौपदी के साथ एकांत में होगा तो वहां दूसरा भाई नहीं जाएगा. यदि कोई भाई इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसे वनवास काटना पड़ेगा.


Third party image reference
एक कथा के अनुसार एक बार जब युधिष्ठिर द्रौपदी के साथ एकांत में थे तभी अर्जुन के पास एक व्यक्ति रोता हुआ आया और बोला कि 'मेरी गाय डाकू ले गए हैं आप मेरी सहायता कीजिए’ उस समय सारे अस्त्र-शस्त्र युधिष्ठिर के कक्ष में रखे थे, जहां वो द्रौपदी के साथ मौजूद थे. ऐसे में अर्जुन ने उस व्यक्ति की मदद करने के लिए कमरे में प्रवेश कर लिया, इसके कारण नियम टूट गया और अर्जुन को वनवास जाना पड़ा था.


Third party image reference
आपको बतादें की जब एक बार जब सत्यभामा ने द्रौपदी से पूछा कि आप सभी पांडवों को कैसे खुश रखती हैं तो द्रौपदी ने कहा कि 'मैं अहंकार, काम, क्रोध को छोड़कर बड़ी ही सावधानी से सभी पांडवों की सेवा करती हूं, पति के अभिप्राय को पूर्ण संकेत समझकर अनुसरण करती हूं इसीलिए मेरा मन पांडवों के सिवाय कहीं नहीं जाता और उनके स्नान किए बिना मैं स्नान नहीं करती.
तो अब तो आप समज ही गये होंगे की कौनसा नियम बनाया था पांडवों ने द्रौपदी को लेकर.
रोजाना ऐसी ही अटपटी ख़बरों के लिए हमें फ़ॉलो जरुर करें.
Previous article
Next article

Leave Comments

Post a comment

• अगर आप इस आर्टिकल के बारे में कुछ कहेंगे या कोई सवाल कमेंट में करेंगे तो हमें बहुत ख़ुशी होगी

loading...
loading...
loading...