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Friday, 10 April 2020

पांडवों ने बनाया था द्रौपदी को लेकर यह नियम, जरुर जाने

आपको बतादें की द्रौपदी से विवाह के बाद एक दिन नारद मुनि जब पांडवों से मिलने आए तो उन्होंने पांडवों को बताया कि प्राचीन समय में सुंद-उपसुंद नामक दो राक्षस भाई थे और उन्होंने अपने पराक्रम से देवताओं को भी जीत लिया था, पर एक स्त्री के कारण दोनों में फूट पड़ गई. इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे का वध कर दिया, ऐसी स्थिति तुम्हारे साथ न हो इसलिए कोई न कोई नियम बनाओ ऐसा नारद मुनि का कहना था.


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बाद में पांडवों ने एक नियम बनाया कि द्रौपदी एक नियमित समय तक एक भाई के पास रहेगी, जब एक भाई द्रौपदी के साथ एकांत में होगा तो वहां दूसरा भाई नहीं जाएगा. यदि कोई भाई इस नियम का उल्लंघन करता है तो उसे वनवास काटना पड़ेगा.


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एक कथा के अनुसार एक बार जब युधिष्ठिर द्रौपदी के साथ एकांत में थे तभी अर्जुन के पास एक व्यक्ति रोता हुआ आया और बोला कि 'मेरी गाय डाकू ले गए हैं आप मेरी सहायता कीजिए’ उस समय सारे अस्त्र-शस्त्र युधिष्ठिर के कक्ष में रखे थे, जहां वो द्रौपदी के साथ मौजूद थे. ऐसे में अर्जुन ने उस व्यक्ति की मदद करने के लिए कमरे में प्रवेश कर लिया, इसके कारण नियम टूट गया और अर्जुन को वनवास जाना पड़ा था.


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आपको बतादें की जब एक बार जब सत्यभामा ने द्रौपदी से पूछा कि आप सभी पांडवों को कैसे खुश रखती हैं तो द्रौपदी ने कहा कि 'मैं अहंकार, काम, क्रोध को छोड़कर बड़ी ही सावधानी से सभी पांडवों की सेवा करती हूं, पति के अभिप्राय को पूर्ण संकेत समझकर अनुसरण करती हूं इसीलिए मेरा मन पांडवों के सिवाय कहीं नहीं जाता और उनके स्नान किए बिना मैं स्नान नहीं करती.
तो अब तो आप समज ही गये होंगे की कौनसा नियम बनाया था पांडवों ने द्रौपदी को लेकर.
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