रात के समय ग़लती से भी इस जगह के पास से ना गुजरें

वैसे देखा जाए तो हमारे हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि गंगा जैसी पवित्र नदी का जल पीने या नहाने मात्र से मानव के समस्त पाप धुल जाते हैं. यही वजह है कि दाह संस्कार के बाद अस्थियों की राख को गंगा में प्रवाहित कर दिया जाता है.


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इसके बारे में लोगो की ऐसी भी मान्यता है कि मनुष्य की अस्थियां वर्षों तक गंगा नदी में ही रहती हैं. गंगा नदी धीरे-धीरे उन अस्थियों के माध्यम से इंसान के पाप को खत्म करती है और उससे जुड़ी आत्मा के लिए नया मार्ग खोलती है.


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हमारे हिन्दू धर्म में भगवान शिव और मां काली को श्मशान घाट का भगवान कहा गया है. ऐसे में भगवान शिव जहां भस्म से पूरी तरह ढके होते हैं और ध्यानमग्न होते हैं, वहीं मां काली बुरी आत्माओं का पीछा करती हैं.
ऐसी मान्यता है कि शरीर के अंतिम संस्कार के बाद भगवान शिव मृत को अपने अंदर समाहित कर लेते हैं और किसी भी मानव को अपनी उपस्थिति से इस प्रक्रिया में बाधा नहीं पहुंचानी चाहिए नहीं तो उन्हें मां काली के प्रकोप का सामना करना पड़ सकता है.


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हिंदू शास्त्रों के अनुसार हमे कभी भी दिन के समय भी किसी भी इंसान को श्माशन घाट में नहीं घूमना चाहिए. इस समय भी बुरी आत्माएं सक्रिय हो जाती है और मानव इन बुरी आत्माओं या नकारात्मक शक्तियों से लड़ने में सक्षम नहीं होता है.


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शास्त्रों में ऐसा बताया गया है की रात को नकारात्मक शक्तियां अधिक प्रभावीशाली होती है और ये नकारात्मक शक्तियां मानसिक रूप से कमजोर व्यक्ति को तुरंत अपने प्रभाव में ले लेती हैं, मनोवैज्ञानिक बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर हो और नकारात्मक सोच से घिरा हुआ हो तो ये संभावना और भी ज्यादा बढ़ जाती है.


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वैसे देखा जाए तो हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार नदी के किनारे ही किए जाते हैं, क्यूंकि इस स्थान को श्मशान घाट कहा जाता है. श्मशान घाट पर शवों को लाकर उनका दाह संस्कार या अंतिम संस्कार किया जाता है.
आपको बतादें की श्मशान घाट पर आत्माओं, भूत-प्रेत आदि का निवास भी माना जाता है साथ ही यहां अघोरी भी होते हैं इसलिए जैसे ही चंद्रमा आकाश में नजर आने लगे उस समय से लेकर सूर्योदय तक जीवित मनुष्यों को श्माशन घाट या उसके करीब से बिल्कुल भी नहीं गुजरना चाहिए.
तो यह थे वो कारण जो बताते है की रात के समय या दिन में कभी भी किसी श्मशान के पास से नहीं गुजरना चाहिए.
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