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Friday, 18 January 2019

अमिताभ की पहली फिल्म के लिए अपनी फीस सुनकर आपके होश उड़ जायेंगे

वैसे तो आज अमिताभ बच्चन महानायक, स्टार ऑफ द मिलेनियम और पता नहीं क्या क्या हैं. लेकिन आपको बतादें की उनकी शुरुआत इतनी ज्यादा हाई फाई नहीं थी, बच्चन साहब को पहली फिल्म के लिए मिले थे 5 हजार रुपए. वो फिल्म थी सात हिंदुस्तानी. इस फिल्म के माई बाप थे ख्वाजा अहमद अब्बास. यानी उन्होंने फिल्म की कहानी, स्क्रीनप्ले भी लिखा था, पैसा भी खुद ही लगाया था और डायरेक्ट भी उन्होंने ही की थी.

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तो ये अमिताभ की पहली फिल्म थी जिससे 49 साल पहले उनके हीरो बनने की शुरुआत हुई. इसी फिल्म से जुड़ा किस्सा बॉलीवुड विंटेज नाम के हैंडल से ट्वीट हुआ था जिसको खुद अमिताभ ने रिट्वीट किया था. वैसे यह किस्सा हमने देखा तो हमें लगा की भई किस्सा मजेदार है इसीलिए यह सबको जानना चाहिए, तो चलिए जानते है.

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किस्सा टीनू आनंद के हवाले से है, वैसे आपको बतादे की ये भी एक अच्छे एक्टर हैं यदि आपको याद ना हो तो हम याद दिला देते हैं की वह फिल्म चमत्कार में कुंडा बने थे और हासिल में जिमी शेरगिल के पापा बने थे. तो वो टीनू आनंद बताते हैं कि वो ख्वाजा अब्बास के फैमिली फ्रेंड हुआ करते थे. स्कूल कॉलेज से छुट्टी मिलती तो लपक के जा पहुंचते उनके पास, कहते कि अपनी फिल्म में यदि कोई रोल हो तो हमें भी दे दो, छोटा मोटा ही सही.

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वैसे अब्बास साहब को एक हिरोइन की तलाश थी और उनको टीनू आनंद की दोस्त नीना सिंह मिली. टीनू के घर में पूछा कि क्या फिल्म में काम करोगी? वो मान गई और अब्बास का काम बन गया. एक दिन नीना ने कहा कि टीनू बस, मुझे अपने एक फ्रेंड की फोटो चाहिए. वो कलकत्ते में रहता है, उसे फिल्म लाइन में इंट्रेस्ट भी है साथ ही वो एक हीरो बनना चाहता है.

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आपको बतादें की अमिताभ ने साल 2016 में ये फोटो ट्वीट करते हुए लिखा था कि इसे देखकर मुझे रिजेक्ट किया गया.
फोटो मिली तो उसमें एक महा लंबा आदमी दिखा. अब्बास ने कहा कि इसको बोलो अपने खर्चे पर बंबई आए और ऑडिशन दे. साथ में ये भी कहा कि उनको पता नहीं है, ये ऑडिशन कब होगा. तो तब तक इंतजार करे और धीरज धरे. ऐसे बच्चन बंबई पहुंचे. टीनू उनको लेकर अब्बास के ऑफिस पहुंचे.
अंत में दोनों की बातचीत हुई, टीनू को जिम्मेदारी मिली कि वो अमिताभ से बताएं. कि उनको फिल्म में काम करने को मिलेगा और उनको 5 हजार रुपए मिलेंगे पूरी फिल्म के लिए. वैसे आपको बतादें की टीनू इस निगोशिएशन को ‘डर्टी जॉब’ कहकर संबोधित करते हैं.
अब अमिताभ और उनके भाई अजिताभ ने सुना तो वो दोनों चौंक गये, ये भी कहा गया था कि फिल्म बनने में एक साल भी लग सकता है या फिर पांच साल भी. अमिताभ एक्टिंग के लिए इतने ज्यादा बेताब थे की वो तुरंत ही इस प्रपोजल से बड़े नाखुश हुए, लेकिन उन्होंने हामी भर दी. इस तरह सात हिंदुस्तानी फिल्म में एक कवि का रोल उनको मिला था.
तो आपको यह किस्सा कैसा लगा, हमें कमेंट करके जरुर बताये, आप भी अमिताभ बच्चन के दीवाने है तो इसे लाइक और शेयर जरुर करे.
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