बुद्ध जयंती विशेष : बुद्ध से जानिए क्रोध करने के सात अनर्थ

आज हम आपको बुद्ध जयंती के इस मौके पर गौतम बुद्ध द्वारा बताये गये उन सात अनर्थ के बारे में बताने वाले है जिसके बारे में आपने आज तक नहीं जाना होंगा, क्यूंकि उनके अनुसार जो कोई भी इंसान क्रोध करता है तो उसके शत्रु को इन सात बातो से बड़ी प्रसन्नता होती है.

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 क्रोध करने के 7 अनर्थ
कोई भी इंसान ऐसा चाहता है की उसक शत्रु कुरूप हो जाये क्यूंकि कोई भी ऐसा नहीं चाहता है की उसका शत्रु स्वरूपवान हो, जब भी किसी इंसान को क्रोध आता है तो भले ही उसने अच्छे से स्नान किया हो, सुगंध लगाई हो या बाल दाढ़ी ठीक से की हो फिर भी वह कुरूप सा लगता है और इससे उनके शत्रु प्रसन्न होते रहते है.

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हर कोई मनुष्य ऐसा चाहता है की उनका शत्रु पीड़ा पायें, क्यूंकि कोई भी आदमी अपने शत्रु को आराम से नहीं रहने देना चाहता, इसीलिए कोई भी इंसान पीड़ा में हो तो उसक शत्रु मन ही मन प्रसन्न होता रहता है.
कोई भी इंसान ऐसा ही चाहता है की उसक शत्रु संपन्नता ना रहे क्यूंकि कोई भी इंसान अपने शत्रु को अच्छे से रहते नहीं देखना चाहता ऐसे में आपकी असंपन्नता देखकर आपका शत्रु भी प्रसन्न होते रहता है.

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कोई भी इंसान ऐसा ही चाहता है की उसक शत्रु धनवान ना हो क्यूंकि कोई भी इंसान अपने शत्रु को पैसे वाला नहीं देखना चाहता ऐसे में आप ने श्रम के बल पर पसीने से, ईमानदारी से पैसा इकट्ठा किया हो, वह गलत काम करने लगता है तो आपका शत्रु भी खुश होते रहता है.

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कोई भी इंसान ऐसा ही चाहता है की उनके शत्रु की नामवरी ना हो क्यूंकि कोई भी इंसान अपने शत्रु की ख्याति नहीं देख सकता और जब उसे क्रोध आता है तो वो अपने आप ने जो भी अच्छा-खांचा नाम कमाया होता है उसे गवां देता है और आपका शत्रु इसी बात से खुश होता रहता है.

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कोई भी शत्रु ऐसा ही चाहता है की आप मित्रहीन रहे आपका कोई भी मित्र ना हो, जब आपको क्रोध आता है तो आप अपने अच्छे मित्र को भी खो देते हो इसीलिए आपको कभी भी गुस्सा नहीं करना चाहिए और अपने सगे संबंधी के साथ अच्छे से रहना चाहिए. यदि ऐसा नहीं होता है तो आपका शत्रु बड़ा ही खुश रहता है.
हरेक व्यक्ति ऐसा ही चाहता है की उसके शत्रु को कभी भी मरने के बाद सुगति ना मिले और वो नरक में जाये, क्यूंकि जब मनुष्य को क्रोध आता है तो वह अपने मन,वचन और कर्म में गलत काम करने लगता है और इससे उसक शत्रु बेहद ही ज्यादा खुश रहता है.
इसीलिए हमें जब भी क्रोध आता है तो अपने क्रोध को काबू में करना चाहिए और काम, क्रोध, ईर्ष्या से अपने आप को मुक्त करना चाहिए, यदि इंसान ऐसा नहीं करता है तो उसका सर्वनाश हो जाता है.
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