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Saturday, 27 July 2019

क्या होगा, अगर दुनिया में सिर्फ़ शाकाहारी लोग ही होते

इस दुनिया में कोई भी इंसान क्या खाए और क्या ना खाए ये उसकी पसंद पर निर्भर होता है क्यूंकि कुछ लोग शाकाहारी होते हैं तो कुछ मांसाहारी. लेकिन जो शाकाहारी हैं वो चाहते हैं कि सारी दुनिया शाकाहारी हो जाए. अगर कोई शाकाहारी है तो उसके पीछे उसकी अपनी वजह हैं.

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आपको बतादे की मसलन कुछ लोगों को जानवरों की तकलीफ़ देखकर दुख होता है तो वो शाकाहारी हो जाते हैं या फिर कुछ लोग अपना रहन-सहन बदलने के लिए शाकाहारी हो जाते हैं. शाकाहारी बनने के उनके अपने तर्क होते हैं, लेकिन क्या ये मुमकिन है कि सारी दुनिया शाकाहारी हो जाए. पहली बात तो ये कि ये संभव ही नहीं है. दूसरे ये कि अगर ऐसा हो भी गया तो इससे बहुत नुक़सान हो सकता है.

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आपको बतादें की इस बारे में कोलंबिया में इंटरनेशनल सेंटर फॉर ट्रॉपिकल एग्रीकल्चर में काम करने वाले एंड्र्यू जार्विस कहते हैं कि विकसित देशों में शाकाहारी होने के बहुत से फ़ायदे हैं पर ये पर्यावरण और सेहत दोनों के लिए बेहतर है. लेकिन विकासशील देशों में ये गरीबी को बढ़ावा देने की वजह भी बन सकता है. अगर सारी दुनिया से रातों-रात मांस खाने वालों को हटा दिया जाए तो क्या होगा?.

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वैसे आपको बतादे की मांसाहारियों के लिए बड़े पैमाने पर जानवर पाले जाते हैं. जिसके लिए पर्याप्त मात्रा में जगह चाहिए. एक अंदाज़े के मुताबिक़ दुनिया में बारह अरब एकड़ ज़मीन खेती और उससे जुड़े काम में इस्तेमाल होती है. इसका 68 फीसद हिस्सा जानवरों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. अगर सभी सब्ज़ी खाने वाले हो जाएंगे तो करीब 80 फ़ीसद ज़मीन चरागाहों और जंगलों के लिए इस्तेमाल में लाई जाएगी.
तो अब आपको यह भी बतादें की शाकाहारी होने के अपने फ़ायदे सारे फायदे हैं, इसमें कोई शक नहीं. स्प्रिंगमैन की कंप्यूटर मॉडल स्टडी कहती है कि अगर 2050 तक सारी दुनिया के लोग शाकाहारी हो जाएंगे तो बेवक़्त मरने वालों की तादाद में छह से दस फ़ीसद तक की कमी आ सकती है. इसमें लोगों को कैंसर, शुगर, हार्ट अटैक जैसी बीमारियों से भी छुटकारा मिल जाएगा. लोग बीमार कम होंगे तो उनके मेडिकल बिल भी कम हो जाएंगे.
आपको बतादें की फिर लोग इस पैसे का इस्तेमाल वो जिंदगी की दूसरी ज़रूरतें पूरी करने लिए कर पाएंगे. ये ख़याल सुनने में बहुत अच्छा है. लेकिन इस बात को नहीं भूलना चाहिए कि दाल-चावल और सब्ज़ियां प्रोटीन का विकल्प नहीं हो सकतीं. जानवरों के गोश्त में पोषक तत्व ज़्यादा होते हैं. शरीर के लिए प्रोटीन भी उतना ही ज़रूरी है, जितना कि दूसरे पोषक तत्व. गरीबों के लिए तो प्रोटीन का सबसे सस्ता ज़रिया ही जानवरों का गोश्त है. अगर सारी दुनिया शाकाहारी हो जाएगी तो सबसे बड़ा संकट विकासशील देशों के लिए हो जाएगा.
साथ ही मीट और मीट से बनी चीज़ों के दाम बढ़ा दिये जाएं. फल-सब्ज़ियों के दाम कर रखे जाएं. फिर जिन लोगों की जेब इजाज़त देगी वही लोग मीट या मीट से बनी चीजें खरीदेंगे. मांसाहार के कारोबार से जो ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन होता है उस पर क़ाबू पाने के ऐसे बहुत से छोटे छोटे तरीक़े मौजूद हैं. इसीलिए बस ज़रूरत है इच्छा शक्ति की. उसके लिए सभी को शाकाहारी होने की ज़रूरत नहीं.
तो आपको क्या लगता है, हमें मांसाहारी रहना चाहिए या शाकाहारी हमें कमेंट करके जरुर बताये.
रोजाना ऐसी ही जानकारी के लिए हमें फोलो जरुर करें.

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