बॉलीवुड फिल्म के सबसे विचित्र डायलॉग

दोस्तों आज हम आपको बॉलीवुड के कुछ ऐसे विचित्र डायलॉग बताने वाले है जिसको पढ़कर आप बोलेंगे, यार यह तो वाकई में विचित्र है, तो चलिए जानते है.
दोस्तों, जब बात आये डायलॉग की विचित्रता की तो श्रीमान कांति शाह का कोई सानी नहीं है, गुंडा और लोहा उनकी दो अमर कृतियाँ हैं जिनके डायलॉग सुन के लगता है कि साक्षात कालिदास ने कांति शाह का मार्गदर्शन किया होगा.
बॉलीवुड फिल्म के सबसे विचित्र डायलॉग
“मेरा नाम है बुल्ला,रखता हूँ मैं खुल्ला” , विचित्रता के सारे पैमाने में खरा उतरता है.

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“सर का ताज टेढ़ा हो, तो रानी कानी नज़र आती है”, ये फलसफा सलीम-जावेद के बस का नहीं था.
“ लंबू ने तुझे लंबा कर दिया, माचिस की तीली को खंबा कर दिया” - ये सिमिली है या मेटाफर, व्याकरण के विद्वान बताएं.
“मैं तुझे धोबीघाट पर, टुटेली खाट पर लिटा लिटा कर मारूंगा. ऐसी अल्टी पलटी कर के मारूंगा कि तू खून की उल्टी कर के मरेगा”- साक्षात महाकवि भूषण के अलंकार की याद आ जाती है.
“स्याना वही है, जो ठंडी आने से पहले कंबल खरीद लेवे, भले ही वो चोर बाजार का ही क्यों न हो” - स्वर्गीय कादर खान को भी अफसोस हुआ होगा कि ऐसे विलक्षण डायलॉग उनके दिमाग में क्यों नहीं आये.
ऐसे ही अनेक अमर संवादों से भरी है दोनो फिल्में, बॉलीवुड वालों की बेशर्मी देखिए कि ऐसी महान फिल्मों को मुकम्मल इज़्ज़त नहीं बक्शी गयी.

तो आपको कैसे लगे यह सभी डायलोग, हमें कमेंट करके जरुर बताये.

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