INX मीडिया केस: विदेशी निवेश से जुड़े FIPB बोर्ड ने की थी गड़बड़ी

जैसे की हम सब जानते है की केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने 15 मई, 2017 को एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें ऐसा आरोप लगाया गया था कि आईएनएक्स मीडिया कंपनी को फायदा पहुंचाने के लिए विदेशी निवेश को स्वीकृति देने वाले विभाग फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड यानि की एफआईपीबी ने कई तरह की गड़बड़ियां की थीं और उस समय पी चिदंबरम वित्त मंत्री थे, इसलिए बुधवार देर रात पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को सीबीआई ने आईएनएक्स मीडिया केस में भष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया है.
क्या है एफआईपीबी ?

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बतादें की फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड यानि की एफआईपीबी एक ऐसी एजेंसी थी जो देश में निवेश संवर्धन करने के साथ-साथ एफडीआई से संबंधित सभी मामलों पर आवश्यक कार्रवाई करती थी.
1990 के दशक में हुई थी शुरुआत

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बतादें की साल 1990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक उदारीकरण के मद्देनजर प्रधानमंत्री कार्यालय के अंतर्गत विभाग फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड का गठन किया गया था.
अरुण जेटली ने खत्म किया था एफआईपीबी

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शायद आपको पता ना हो तो बतादें की साल 2017-18 में पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में एफआईपीबी को भंग करने का फैसला लिया था.
बोर्ड के कार्य
अब अंत में बतादें की इस बोर्ड का काम था कि यह जल्द से जल्द विदेशी निवेश के प्रस्तावों को स्वीकृत करे और अन्य एजेंसियों को पारदर्शिता बनाए रखने के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में एफडीआई को बढ़ावा देने का भी बोर्ड काम करता था, यह बोर्ड विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए सरकारी, गैर-सरकारी और तमाम अन्य उद्योगों से बात करता था.

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