जोमैटो और स्विग्गी ने लोगों का जीवन आसान कर दिया है या उन्हें और आलसी बना दिया है?

जैसे कि हम सब जानते है कि जोमैटो और स्विग्गी ने पहले तो सस्ता दाना डाला…. और जब चिड़ियाओं को लत लग गई तब रेट बढ़ा दिए। न सिर्फ़ लोगों को निकम्मा बनाया बल्कि परिवार नाम की संस्था से माँ जैसे सभ्य अन्नपूर्णा को नाबूद कर दिया। चार जन के परिवार के लिए आठ सौ से हजार रुपये खर्च करने पर एक वक्त का खाना आता है।

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इस नई पीढ़ी को आसानी से बिन हाथ हिलाए चीजें ज्यादा पसंद आती हैं। जो सेहत और आर्थिक दोनों ही दृष्टि से हानिकारक हैं। मजबूरी में ऐसा करना अलग बात है परन्तु इसका लती होना भी गलत है।
कुछ लोग ऐसा भी कहेंगे क्या पुराने समय की सी बातें कर रहे हो तो इस मे ऐसा नहीं पुराना हो या नया भोजन तो हर जमाने में स्वास्थ्यवर्धक ही करना चाहिए। घर में पका भोजन हर दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है। यदि पति पत्नी दोनों कार्य करते हैं तो भोजन भी दोनों मिलकर पकाएँ।
प्यार से और नफासत से बना भोजन आपकी सेहत - सूरत व सीरत तीनों को स्वस्थ व सुन्दर बनाता है। यदि धन बेशुमार है तो भी खाना घर पर बनाने की व्यवस्था ही करें। चाहे हाथ बटाने को एक कुक रख लें परन्तु खाना घर पर ही बनाएं, ऐसा आपके लिए फायदेमंद साबित होगा।

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