क्या किसी महिला का जीवन भर अविवाहित रहना सही है, जानिए

दोस्तों अक्सर ऐसा देखा जाता है की हमारे देश में किसी महिला के अकेले रहने पर लोग उसे अजीब नजरों से देखते हैं, रात के 11बजे भी कोई महिला सड़क पर अकेली पैदल जा रही होगी तो भी सब यह सोचेंगे माजरा क्या है? यानि भारत के लिये अकेली महिला एक अजूबा है. शारीरिक जरूरतों की पूर्ति के लिये विवाह की रीति बनी, मगर से*क्स पूर्ति व्यक्ति की खुद की इच्छा पर निर्भर है, अनिवार्य बिलकुल भी नहीं.

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तो अब अगर एक लड़की या महिला विवाह के बंधन में नहीं बंधना चाहती तो सीधा सा अर्थ है कि उसे शारीरिक जरूरत का या तो अहसास ही नही होता या वो से*क्स जैसे कार्य को अच्छी दृष्टि से नहीं देखती.
वैसे आपको बतादें की अगर से*क्स ऐसा हीन कार्य है तो ये दुनिया इसके लिये इतनी बेकरार क्यों हैं? तो जनाब जबाब यह है कि वाकई से*क्स कोई ऐसी अनुभूति या जरुरत नहीं है जिसके बिना लोग जीवित न रहे.

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हजारों-लाखों साधू-साध्वियां बिना विवाह किये आराम से रह रहे हैं, उनके लिये ब्रह्मचर्य एक तपस्या समान है, वे इसे मोक्ष प्राप्त करने का माध्यम मानते हैं फिर श्री हनुमान जी ने स्वयं ब्रह्मचारी रहकर ब्रह्मचर्य के लिये ईश्वर का मूक अनुमोदन भी दिया हुआ है.

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आपको बतादें की लड़की या स्त्री की परिस्थिति भिन्न हो सकती है या फिर ऐसा भी हो सकता है की वह जीवन का कोई विशेष लक्ष्य लेकर चल रही हो, जिसको हासिल करने में वह विवाह को एक बाधा मानती हो. आज के युग में नौकरी न होने या किसी अन्य वजह से युवक 28 की उम्र से पहले और युवतियाँ 25 की उम्र से पहले विवाह नहीं करते, मेरा मानना है कि जब वे 28 की उम्र तक अविवाहित रह कर कोई परेशानी अनुभव नहीं कर रहे तो आगे भी ऐसे ही अकेले रहने में मुश्किल क्या है? अकेले रहो, मस्त रहो, दुनिया घूमो, ऐश करो.

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