इस बार शरद पूर्णिमा 13 अक्तूबर को, औषधियों के अमृतत्व प्राप्ति का दिन, जानिए - SupportMeYaar.com

Trending Now

Post Top Ad

Saturday, 12 October 2019

इस बार शरद पूर्णिमा 13 अक्तूबर को, औषधियों के अमृतत्व प्राप्ति का दिन, जानिए

जैसे कि हम जानते है कि शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा का अपनी सोलह कलाओं से परिपूर्ण होने तथा तपश्चर्या के प्रभाव से पच्चीस करोड़ वर्ष की आयु प्राप्त कर चुके 'अगस्त' तारे के उदय का दिन होता है।

Third party image reference
बतादें की शरद पूर्णिमा 13 अक्टूबर रविवार को है। इस दिन चंद्रमा पूर्ण कांतिमय होकर अपनी शीतल किरणों से फसलों पेड़-पौधों तथा वनस्पतियों पर अमृत वर्षा करते हैं चंद्रमा की इन्हीं किरणों के प्रभाव से इनमें अमृत्व का प्रभाव आ जाता है।
बतादें की ये जीवन दायिनी होकर जीव जगत को आरोग्य प्रदान करती हैं। चंद्रमा की यही पूर्ण आभा संसारिक प्राणियों में अधिक अनुराग उत्पन्न करते हुए जड़ता में भी चेतना का भाव उत्पन्न कर देती है। 

क्या है शरद पूर्णिमा का महत्व


Third party image reference
बतादें की आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक के मध्य जब भगवान विष्णु शयन मुद्रा में होते हैं तो पृथ्वी पर भुखमरी, दरिद्रता व सूखे की देवी 'अलक्ष्मी' का साम्राज्य रहता है।
बतादें की इन्हीं के साथ प्रलय के अन्य तीन देवता, ज्वर-बुखार जन्य रोंगों के स्वामी रूद्र, भूस्खलन बाढ़ और सूखे के स्वामी वरुण तथा अनेक रोंगों, दुर्घटनाओं एवं अकाल मृत्यु के स्वामी यम का पृथ्वी पर तांडव रहता है।

Third party image reference
अब इस अवधि में देवप्राण कमजोर पड़ जाते हैं और आसुरी शक्तियों का वर्चश्व बढ़ जाता है परिणाम स्वरुप पृथ्वी पर अधिक पाप बढ़ने लगता है।
बतादें की शक्ति आराधना का पर्व नवरात्रि के नवें दिन मां सिद्द्धिदात्री की आराधना करके जब दशमी तिथि को व्रत पारण होती है तो उसके अगले ही दिन विष्णुप्रिया 'पापांकुशा' एकादशी के दिन मां लक्ष्मी पापों पर अंकुश लगाना आरम्भ देती हैं। 
इस बारें में ऐसा भी कहा जाता है कि पूर्णिमा के दिन ही जब भगवान कृष्ण अपनी नौ लाख गोपिकाओं के साथ स्वयं के ही नौलाख अलग-अलग गोपों के रूप में महारास कर रहे होते हैं तो मां महालक्ष्मी पृथ्वी पर घर-घर जाकर सबको दुःख दारिद्रय से मुक्ति का वरदान देती हैं।
अंत मे बतादें की जिस घर के सभी प्राणी सो रहे होते हैं वहां से 'लक्ष्मी' दरवाजे से ही वापस चली जाती है। तभी शास्त्रों में इस पूर्णिमा को 'कोजागरव्रत' यानी कौन जाग रहा है व्रत भी कहते हैं।
इसदिन रात्रि में की गई लक्ष्मी पूजा सभी कर्जों से मुक्ति दिलाती हैं। अतः शास्त्र इस शरदपूर्णिमा को 'कर्जमुक्ति' पूर्णिमा भी कहते हैं।

तो आप क्या करेंगे इस पुर्णिमा को, हमे कंमेंट करके जरूर बताएं।

रोजाना ऐसी ही जानकारी के लिए हमे फ़ॉलो जरूर करें।

No comments:

Post a Comment

• अगर आप इस आर्टिकल के बारे में कुछ कहेंगे या कोई सवाल कमेंट में करेंगे तो हमें बहुत ख़ुशी होगी
• गलत शब्दों का प्रयोग न करे वरना आपका कमेंट पब्लिश नहीं किया जायेगा