नासा के ऑर्बिटर ने चांद से भेजी यह सबसे भयानक तस्वीर - SupportMeYaar.Com

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नासा के ऑर्बिटर ने चांद से भेजी यह सबसे भयानक तस्वीर

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दोस्तो, मिशन चंद्रयान-2 के फेल होने के बाद इसरो और नासा समय-समय पर चांद से जुड़ी जानकारियां साझा कर रहे हैं, ऐसे में इस बीच एक रिसर्च में ये दावा किया गया है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उपस्थित बर्फ के भंडार पुराने अनुमानों की तुलना में बहुत ज्यादा नए हैं।

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आपको बतादें की यह दावा अमरीका की ब्राउन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने नासा के लूनर रिकॉनिस्सेंस ऑर्बिटर के डाटा का अध्ययन के बाद किया है।

बतादें की इससे पहले वैज्ञानिकों का यह अनुमान था कि यहां करोड़ों वर्ष पहले पुराने बर्फ के भंडार हैं। नया अध्ययन चंद्रमा की सतह के इस हिस्से के बारे में लोगों की रुचि को व बढ़ा सकता है.
चांद के दक्षिणी ध्रुव पर बड़े क्रेटरों का किया गया अध्ययन
कुछ मिली जानकारी के मुताबिक, नासा का ये ऑर्बिटर 2009 से चंद्रमा की परिक्रमा कर रहा है.
बतादें की इस दौरान शोधकर्ताओं ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव में उपस्थित बड़े क्रेटरों का अध्ययन कर उसकी आयु का पता लगाने का दावा भी कर दिया है।
बतादें की इकारस नामक जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में बोला गया है कि बड़े क्रेटरों के भीतर बने छोटे क्रेटरों की संख्या गिनकर शोधकर्ताओं ने इनके बनने की अवधि का भी पता लगाया है और इससे पहले वैज्ञानिक का अनुमान था कि क्रेटरों का निर्माण क्षुद्रग्रहों व धूमकेतु के कारण हुआ था.
चांद पर ताजा बर्फ का मिला अनुमान
बतादें की एक अध्ययन में ऐसा बताया गया है कि 31 करोड़ वर्ष से भी पहले बने बड़े क्रेटरों के भीतर बर्फ के भंडार हैं, लेकिन जो छोटे क्रेटर यहां उपस्थित हैं उनमें जमा हुआ पानी अन्य की अपेक्षाकृत ताजा है, जिसका अर्थ है कि चंद्रमा में उपस्थित बर्फ पुराने अनुमानों से बहुत ज्यादा नयी है.
सॉफ्ट लैंडिंग नहीं कर पाया था विक्रम लैंडर
अब आपको बता दें कि 22 जुलाई 2019 को लॉन्च किये गये चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम को चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी, लेकिन लैंडिंग से कुछ सेकेंड पहले ही लैंडर विक्रम का इसरो से सम्पर्क समाप्त हो गया यह बात तो आप सभी जानते ही है।
अब अंत मे इसका नतीजा ये हुआ कि चांद पर इसकी सॉफ्ट लैंडिंग की स्थान हार्ड लैंडिंग हुई। आपको बतादें की कुछ रिपोर्टों में बोला गया है कि वह अपने निर्धारित जगह से करीब 600 मीटर दूर जाकर गिरा, इसके बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने लैंडर से सम्पर्क स्थापित करने की कोशिशें की लेकिन इसमें कामयाबी नहीं मिल पाई.
कैसी लगी आपको यह जानकारी, हमे कंमेंट करके जरूर बताएं।
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