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Friday, 15 November 2019

आखिर क्यों माता सीता का ये श्राप आज भी भुगत रहे हैं ब्राह्मण

जैसे की हम सब जानते है की प्रभु श्रीराम के अपने भाई लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वनवास गए थे। ऐसे में इस बात से अयोध्या के सभी निवासी दुखी थे। साथ ही राजा दशरथ, राम और लक्ष्मण के वियोग के इस दर्द को झेल नहीं सकें और उनकी मृत्यु हो गई।
अपने पिता की मृत्यु की इस खबर से राम और लक्ष्मण सभी को गहरी ठेस पहुंची। इन दोनों ने ही जंगल में ही पिंडदान करने का निश्चय किया। इसके लिए राम और लक्ष्मण दोनों जंगल में ही आवश्यक सामग्री को एकत्रित करने के उद्देश्य से निकल गए। अब इधर पिंडदान का समय निकलता ही जा रहा था।
ऐसे समय में महत्व को समझते हुए माता सीता ने अपने पिता समान ससुर दशरथ का पिंडदान उसी समय राम और लक्ष्मण की उपस्थिति के बिना किया। अब माता सीता ने पूरी विधि विधान का पालन कर इसे सम्पन्न किया।
आपको बतादें की कुछ समय बाद जब राम और लक्ष्मण लौटकर आए तो माता सीता ने उन्हें पूरी बात बताई और यह भी कहा कि उस वक्त पंडित, गाय, कौवा और फल्गु नदी वहां उपस्थित थे। इन सभी के साक्षी के तौर पर इन चारों से सच्चाई का पता लगा सकते हैं।
पंडित

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अब श्री राम ने इस बात की पुष्टि करने के लिए चारों से पूछा तो इन चारों ने ही यह कहते हुए झूठ बोल दिया कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इस बात से दोनों भाई सीता से नाराज हो गए। और राम और लक्ष्मण को लगा कि सीता झूठ बोल रही हैं। ऐसे में इनकी झूठी बातों को सुनकर सीता माता क्रोधित हो गईं और उन्हें झूठ बोलने की सजा देते हुए आजीवन श्रापित कर दिया। अब सारे पंडित समाज को श्राप मिला कि पंडित को कितना भी मिलेगा लेकिन उसकी दरिद्रता हमेशा बनी रहेगी।
कौवे

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अब इस बारे में कौवे को भी श्र्राप दिया कि उसका अकेले खाने पर कभी पेट नहीं भरेगा और वह आकस्मिक मौत मरेगा।
फल्गु नदी

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अब फल्गु नदी के लिए श्राप था कि पानी गिरने के बावजूद नदी ऊपर से हमेशा सुखी ही रहेगी और नदी के ऊपर पानी का बहाव कभी भी नहीं होगा।
गाय

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अब अंत में गाय को श्राप दिया गया कि हर घर में पूजा होने के बाद भी गाय को हमेशा लोगों का जूठन ही खाना पड़ेगा।
वैसे आपको बतादें की रामायण में इस कहानी का जिक्र भी किया गया है। आप आज के समय में भी इन चारों पर सीता माता के श्राप के प्रभाव को देख सकते हैं। ये सारी बातें आज भी सच होते नजर आती हैं।

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