एक ऐसा रहस्य जो दुर्योधन था भगवान श्रीकृष्ण के बारे में


आपको बतादें की दुर्योधन पांडवों को उनका अधिकार देना नहीं चाहता था परंतु युधिष्ठिर और श्रीकृष्ण चाहते थे कि एक बार शांति का प्रस्ताव दुर्योधन को ज़रूर देना चाहिए.



तो अब इसलिए भगवान श्रीकृष्ण को शांति का संदेश देने के लिए हस्तिनापुर भेजा गयाउस समय धृतराष्ट्र के मन में यह विचार आया कि अगर श्रीकृष्ण की पूजा की जाएं और उन्हें बहुत से उपहार दी जाएं तो कदाचित वह पांडवों का पक्ष छोड़कर दुर्योधन के पक्ष में शामिल हो जाएं.

लेकिन ऐसा नहीं हुआ और जब धृतराष्ट्र ने विदुर और दुर्योधन को अपना यह विचार कहातब दुर्योधन ने ऐसा करने के लिए इनकार कर दियाउस समय दुर्योधन ने अपने पिता से कहा कि ' मैं जानता हूँ कि वर्तमान समय में तीनों लोकों में श्रीकृष्ण से ज्यादा कोई पूजनीय नहीं है परंतु अगर हम उनकी पूजा करेंगे तो वह यह सोचेंगे कि हम उनसे डर गए है.

अब उसके बाद दुर्योधन ने कहा कि श्रीकृष्ण का अर्जुन के प्रति प्रेम हैउन्हें किसी भी तरह पांडवों के विरुद्ध किया नहीं जा सकताऐसे में हम क्षत्रिय धर्म का विचार करते हुए ऐसा कोई कार्य नहीं करना चाहिएजिससे यह लगे कि हम उनसे भयभीत हो गए है. मैं जानता हूँ कि श्रीकृष्ण तीनों लोकों में श्रेष्ठ है परंतु हमें उन्हें कुछ भी नहीं देना चाहिए.

तो इस तरह महाभारत के दुर्योधन यह जानता था कि श्रीकृष्ण तीनों लोकों में श्रेष्ठ और पूजनीय ईश्वर है परंतु वह अपने अभिमान के कारण उनकी शरण में जा सका और अंत में काल की शरण में चला गया.

उम्मीद है आपको यह जानकारी जरुर पसंद आई होगी.

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