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शादी के बाद कभी नहीं गयी मायके देवी सीता

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हिंदू धर्म में भगवान श्रीराम और देवी सीता के चरित्र और मूल्यों को लोग आज भी बड़ी श्रद्धा के साथ याद करते हैं और उनका अनुपालन करने का प्रयत्न करते हैं। भगवान श्रीराम को हिंदू धर्म में मर्यादा पुरुषोत्तम राम भी कहा जाता है। वहीं देवी सीता त्याग और समर्पण की प्रतिमूर्ति मानी जाती हैं। इस स्टोरी में हम आपको देवी सीता से जुड़ी कुछ ऐसी रोचक बातें बताने जा रहे हैं, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते होंगे।

– श्रीरामचरितमानस में देवी सीता का जिक्र 147 बार आया है।
– वाल्मीकि रामायण के मुताबिक, भगवान श्रीराम से देवी सीता का विवाह बाल्यकाल में ही हो गया था। 18 वर्ष की आयु में वे भगवान श्रीराम के साथ वनवास चली गईं थीं। बता दें कि 33 वर्ष की अवस्‍था में देवी सीता को अयोध्या की महारानी होने का गौरव प्राप्त हो गया था।

– माना जाता है कि राक्षसों के राजा रावण के द्वारा अपहरण के बाद देवी सीता 435 दिनों तक लंका में रहीं।
– वाल्मीकि रामायण में इस बात का उल्लेख है कि रावण जिस सीता को अपने साथ ले गया था दरअसल वो असली सीता नहीं बल्कि उनकी छाया थीं। वास्तविक सीता का स्वरूप तो अग्निदेव के पास था।

– रामायण महाग्रंथ में ऐसा कहीं उल्लेख नहीं मिलता है कि विवाह के बाद कभी सीता अपने मायके जनकपुर गई हों। वनवास गमन की सूचना पर उनके पिता राजा जनक ने अपनी पुत्री सीता को मायके चलने का आग्रह किया था, परंतु देवी सीता ने अपने पति के साथ ही जाने का निर्णय सुनाया था।
– श्रीरामचरितमानस के मुताबिक भगवान श्रीराम ने सरयू नदी में अपना देह त्याग किया था वहीं देवी सीता सशरीर परलोक चली गईं थीं।

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