इसी का नाम जिंदगी: मजबूरी का फायदा, गाँव का मुखिया: प्रेरणा देती कहानी

एक गांव था जिस का नाम लोहिया पुर उस मै व्यक्ति थे नाम था गोपाली जो अपने परिवार को सभी प्रकार से खुश रखता था उसके परिवार के सभी व्यक्ति उसकी काबिलियत से बेहद प्रसन्न में थे वह गांव के प्रत्येक व्यक्ति की मदद किया करता था और गांव का छोटा बड़ा या बूढा हर व्यक्ति उसे जानता और पहचानता था लेकिन हर इंसान का वक्त जरूर बदलता है धीरे-धीरे वह व्यक्ति वृद्ध होता चला गया अब उस व्यक्ति के हाथ पैर नहीं चलते वह इंतजार करता की कोई आए और उसका साथ दें जिससे कि वह नित्य क्रिया कर सके ऐसे ही कुछ दिन निकलता गया और वह व्यक्ति चिढ़ने लगा हर कोई उसे परेशान करने लगा था परंतु परिवार अभी भी उसका पालन पोषण इसलिए करते थे. 






क्योंकि उसके पास उसके पिता के दी हुई भूमि थी इसी भुमि के कारण उस व्यक्ति की परिवार के सदस्य उसकी देखरेख करते थे 1 दिन नगर में रहने वाले एक पंचायत के सदस्य ने गोपाली से आ कर कहा आप अपनी भुमि मुझ को दो मै आप को भुमि के आये हुए धन से आपकी और आप के परिवर की मदद करुगा इस से आप का काम भी हो जयेगा और और मै पास अधिक भुमि भी हो जायेगी इस से मेरा नाम हो जयेगा और आप का काम हो जयेगा परिवार ने सहमती देदी, उस पंचायत के सद्स्य ने भी पूरी भूमी को ले कर उस का उपयोग करना आरम्भ कर दिया, एक बर्ष का धन पुरा दे दिया, गोपाली के परिवार मै खुशियों का माहौल हो गया, दुसरे बर्ष मै पंचायत के सदस्य ने कहा की खेती मै नुकसान हो गया,



इसी तरह उस ने पाच बर्ष निकाल दिये, और बह खेती का नुकसान ही बताता रहा इस बात से परेशान हो गोपाली के परिवार ने अपनी भूमी वापस लेने का प्रयास किया परन्तु उस ने मना कर दिया पर पर वह परिवार क्या कर सकता था जब आदमी सभी प्रकार से मजबूर हो जाए तो वह समझदार होकर भी अपनी समझ का सही प्रयोग नहीं कर सकता कि किसी भी कार्य को करने के लिए सामर्थ का होना अनिवार्य है जो पंचायत के सदस्य के पास है अपना काम निकालने वाला मनुष्य हमेशा ही तुम्हारे कमजोर होने की प्रतीक्षा करता है और जब आप कमजोर हो जाते हैं तब वह आपका फायदा उठाता है इसलिए याद रखना जीवन में आप कमजोर भी हो जाएं तो किसी को यह ज्ञात ना होने दें कि अब आप कमजोर हो गए

Post a Comment

• अगर आप इस आर्टिकल के बारे में कुछ कहेंगे या कोई सवाल कमेंट में करेंगे तो हमें बहुत ख़ुशी होगी

Previous Post Next Post