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क्या आपका बच्‍चा भी बात-बात में करता है गुस्‍सा? इन टिप्‍स की मदद से करें कंट्रोल

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गुस्सा (Anger) भावनाओं (Feelings) को व्‍यक्‍त करने का एक तरीका होता है. मगर कई बार बच्‍चे इसलिए भी चिड़चिड़े हो जाते हैं, क्‍योंकि उनकी नींद पूरी नहीं होती. या फिर वे एग्‍जाम की टेंशन (Exam’s Tension) में भी कई बार गुस्‍सा करते हैं. कई बार बच्‍चे अपनी बात को कह नहीं पाते और वे उत्तेजित हो जाते हैं. बच्‍चों पर परीक्षा में अच्‍छे नंबर लाने का दबाव होता है, ऐसे में अगर वे अच्‍छा नहीं कर पाते तो भी उनकी यह खीझ गुस्‍से के रूप में बाहर निकलती है. गुस्‍सा अगर कभी-कभार आए तब तो कोई बात नहीं, मगर आपका बच्चा अगर बात-बात पर गुस्‍सा करता है, तो इस ओर ध्‍यान दिया जाना चाहिए. इसके लिए आपको गुस्‍सा आने के कारणों को समझने और अपने बच्‍चे को समझाने की जरूरत है.





जानें गुस्‍से की वजह
सबसे पहले यह बहुत जरूरी है कि आप अपने बच्‍चे के गुस्‍से की वजह को समझें. कई बार बच्‍चों के गुस्‍सा करने की वजह बहुत छोटी होती हैं. उन्‍हें इस बात पर भी गुस्‍सा आ सकता है कि कई बार ऐसा लगने लगता है कि उन्‍हें दूसरों से कम अहमियत दी जा रही है. उनसे गुस्‍से का कारण पूछें. कई बार जब बच्चे अपने मन की बात कह देते हैं और समझाने से संतुष्‍ट हो जाते हैं तो उनकी नाराजगी दूर हो जाती है.

खुद में भी करें बदलाव 
बच्‍चे अपने पैरेंट्स से सीखते हैं. इसलिए उनके सामने वैसा ही व्‍यवहार करें जैसी आप उनसे उम्‍मीद करते हैं. इसलिए जब आपको गुस्‍सा आए तो शांत होकर अपने गुस्‍से को कंट्रोल करने की कोशिश करें. अपना गुस्‍सा दूसरों पर न उतारें. इससे बच्‍चे भी गुस्से को नियंत्रित करना आपसे सीखेंगे.

बन जाएं बच्‍चों के दोस्‍त
कई बार बच्‍चे मन ही मन घुटते हैं, वे अपनी बात कह नहीं पाते और इसके ऐवज में वे गुस्‍सा करते हैं. ऐसे में आपको चाहिए कि अपने बच्चों के दोस्त बन कर उनकी समस्‍याओं को समझें. अपने व्‍यवहार में नरमी रखें. ऐसे में वे बिना डरे आपके करीब आएंगे और बेझिझक आपसे अपने मन की बात कह पाएंगे.

गुस्‍से को काबू करना सिखाएं
अपने बच्‍चे में गुस्‍से को नियंत्रित करने की आदत डालें. उन्‍हें लड़ कर अपनी बात कहने के बजाय नरमी से बोलना सिखाएं. उन्‍हें समझाएं कि गुस्‍सा करने से उनकी सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है. बचपन की यह सीख जीवन भर उनके काम आएगी.
न बनाएं बच्‍चों पर दबाव
कई बार बच्‍चों को खेलने या दोस्‍तों से मिलने का ज्‍यादा समय नहीं दिया जाता. इससे भी वे गुस्‍सा करने लगते हैं. वहीं कई बार बच्चों की नींद पूरी न होने की वजह से भी वे गुस्सा कर सकते हैं. इसलिए हर समय उन पर पढ़ाई का दबाव न बनाएं. कुछ समय उन्‍हें खेलने का भी दें. साथ ही उनकी नींद और उनके खान पान का भी पूरा ख्‍याल रखें.

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